
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। बैतूलबाजार के कैलाश वार्ड में में वर्मा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा में तीसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी। आचार्य गोपाल कृष्ण गोस्वामी ने जीवन के परम दायित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवन बहुत दुर्लभ है, अनेक योनियों के बाद यह प्राप्त होता है और इसका उद्देश्य केवल भगवान का भजन है।
उन्होंने कहा कि केवल सुबह-शाम दीया-बाती करना ही भक्ति नहीं, बल्कि भगवान के नाम का जप ही सच्चा साधन है। गुरु द्वारा दिया गया मंत्र एकाग्र होकर आसन पर बैठकर करना चाहिए, जबकि इष्टदेव का नाम हर समय जपा जा सकता है। बिना नाम जप के कल्याण संभव नहीं।
आचार्य ने कहा कि कर्मों की गति को कोई रोक नहीं सकता। भीष्म पितामह जैसे महापुरुष भी अपने कर्मों से नहीं बच सके। इसलिए प्रत्येक कर्म सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने परीक्षित महाराज और कलयुग के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि इस युग में केवल नाम जप से ही मुक्ति संभव है न तप, न यज्ञ, न ध्यान आवश्यक है।
एक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान के नाम में विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति है। जिस तरह एक सब्जी बेचने वाली वृद्धा ने कथा में सुनकर निष्ठा से नाम जप कर नदी पार कर ली, वैसे ही विश्वास से ही जीवन का भवसागर पार किया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि महाभारत केवल युद्ध नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भाई-भाई में बैर से विनाश होता है। मन में बैर और ईर्ष्या न रखें। मां कुंती का उदाहरण देते हुए कहा कि दुख में भगवान साथ रहते हैं, सुख में स्मृति मिट जाती है। इसलिए दुख भी ईश्वर का वरदान है, क्योंकि वह भक्ति की स्मृति बनाए रखता है। तृतीय दिवस की कथा के अंत में उन्होंने कहा कि भगवान का नाम भूल जाना ही सबसे बड़ी विस्मृति है,और नाम जप ही कल्याण का मार्ग है।
आयोजक कृष्ण कुमार वर्मा, मालती मधुसूदन वर्मा, शिवनारायण वर्मा, पुरुषोत्तम वर्मा, राजीव वर्मा और स्वप्निल वर्मा ने सभी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।



