
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मथुरा जिला कारागार में पहली बार शारदीय नवरात्रि पर्व का विशेष रूप से धार्मिक आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक समरसता के मनाया गया। नौ दिनों तक चले आयोजन में बंदियों ने भक्ति और आत्मचिंतन के वातावरण में भागीदारी निभाई। जेल में 350 महिला पुरुष बंदियों ने व्रत रखा। जेल प्रशासन ने उन्हें जेल मैनुअल के हिसाब से व्रत में प्रयोग होने वाला फलाहार दिया। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि जेल में बंदियों की मांग पर पहली बार नवरात्र में माता रानी की मूर्ति स्थापित की गई। पूजा स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया, जहां सुबह-शाम आरती, कीर्तन और दुर्गा सप्तशती के पाठ का आयोजन हुआ। कारागार प्रशासन ने एक रचनात्मक योजना के तहत प्रत्येक बैरक को एक-एक दिन सौंपा गया, जिस दिन उस बैरक के बंदियों द्वारा पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और विशेष आरती का आयोजन किया गया। बंदियों ने पूरी निष्ठा और श्रद्धा से अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन किया, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। नवरात्रि पर्व का समापन विजयादशमी पर हर्षोल्लास के साथ हुआ। अंतिम दिन हवन के साथ विशेष पूजा-अर्चना के बाद समस्त बंदियों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक सहित कई अधिकारियों ने उपस्थित रहकर आयोजन की सराहना की और बंदियों को धार्मिक आयोजनों के माध्यम से आत्मचिंतन और सुधार की प्रेरणा लेने का संदेश दिया। कारागार प्रशासन की इस पहल को न केवल धार्मिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह बंदियों के मानसिक और आध्यात्मिक विकास की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास भी माना जा रहा है। इससे बंदियों में आत्म अनुशासन, आपसी सहयोग और समाज की मुख्यधारा में पुनः लौटने की प्रेरणा मिलेगी।



