रील की सनक में कानून का अंतिम संस्कार !
मेजा में ‘2025 की शव यात्रा’ निकालकर युवाओं ने रोका NH, प्रशासन रहा नदारद

सोशल मीडिया के लाइक-व्यूज के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग बना ड्रामा स्टेज, सड़क पर लेटकर रोने-पीटने से लगा जाम—व्यापारियों और राहगीरों में आक्रोश
विस्तृत खबर:
प्रयागराज के मेजा रोड बाजार में शनिवार दोपहर सोशल मीडिया की सनक ने कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दे दी। कुछ युवाओं ने रील बनाने के उद्देश्य से “2025 की प्रतीकात्मक शव यात्रा” निकालकर राष्ट्रीय राजमार्ग को ही नाट्य मंच बना डाला। दर्जनों युवक सड़क पर लेट गए, रोने-पीटने और मातम जैसे दृश्य रचने लगे, जिससे कुछ देर के लिए एनएच पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
अचानक जाम, राहगीर सहमे
इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से बाजार में अफरा-तफरी मच गई। तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क घेरकर किए गए इस ड्रामे ने राहगीरों और दुकानदारों को दहशत में डाल दिया। कुछ देर के लिए जाम जैसी स्थिति बन गई, जबकि मौके पर कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अमला नजर नहीं आया।
रील के लिए जोखिम भरा तमाशा
व्यस्त बाजार और राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस तरह की हरकतें यातायात नियमों का खुला उल्लंघन हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्टंट किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता था। सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में युवाओं ने न सिर्फ अपनी, बल्कि दूसरों की जान भी खतरे में डाल दी।
व्यापार मंडल का फूटा गुस्सा
मेजा रोड व्यापार मंडल अध्यक्ष पप्पू उपाध्याय ने घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा,
“सड़क पर रील बनाना और यातायात रोकना सीधे तौर पर जान से खिलवाड़ है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा तय है।”
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि सार्वजनिक स्थानों पर सोशल मीडिया के नाम पर हो रहे तमाशों पर तत्काल रोक लगाई जाए। लोगों का कहना है कि नियमों का सख्ती से पालन कराए बिना सड़कें सुरक्षित नहीं हो सकतीं।
निष्कर्ष:
मेजा की यह घटना साफ संकेत है कि सोशल मीडिया की अंधी दौड़ में कानून और सुरक्षा दोनों को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “रील संस्कृति” पर लगाम कसता है या अगली दुर्घटना का इंतजार करता है।



