
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। जनपद बागपत के ऐतिहासिक गांव सिसाना के पश्चिमी छोर पर यमुना नदी के किनारे स्थित खंडवारी वनक्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां चल रहे पुरातात्विक सर्वेक्षण में महाभारत कालीन सभ्यता से जुड़े दुर्लभ अवशेष मिलने का दावा किया गया है।
यह सर्वेक्षण शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक एवं प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन के निर्देशन में किया गया, जिन्होंने स्थल का गहन अध्ययन कर महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं।
5000 वर्ष पुरानी बस्ती के मिले साक्ष्य
डॉ. अमित राय जैन ने बताया कि इस क्षेत्र से प्राप्त अवशेष लगभग चार से पाँच हजार वर्ष पुराने प्रतीत हो रहे हैं, जो महाभारत काल की सभ्यता से जुड़े संकेत देते हैं।
उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति (Painted Grey Ware Culture) से संबंधित बिखरे हुए अवशेष मिले हैं, जो उस युग की पहचान माने जाते हैं।
मृदभांडों के टुकड़े, प्राचीन चूल्हों के अवशेष, मिट्टी के बर्तन और ईंटों के बने संरचनात्मक हिस्से यह प्रमाणित करते हैं कि कभी यहां मानव बस्ती विद्यमान रही होगी।
अवैध खनन के दौरान निकली प्राचीन आकृति
दो दिन पहले क्षेत्र में यह चर्चा फैल गई कि खंडवारी वन के एक प्राचीन टीले की मिट्टी का अवैध खनन करते समय एक प्राचीन मानव निर्मित आकृति बाहर निकली है।
स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ उस स्थल पर उमड़ पड़ी।
गांव के ही विवेक चौहान ने इस सूचना को इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन तक पहुंचाया।
सूचना मिलते ही डॉ. जैन स्वयं स्थल पर पहुंचे और निरीक्षण किया, जिसके बाद उन्होंने इसे “अत्यंत दुर्लभ पुरातात्विक खोज” बताया।
शंकु आकार की प्राचीन संरचना बनी रहस्य
सर्वेक्षण के दौरान इतिहासकार को ईंटों से बनी एक शंकु आकार की प्राचीन संरचना भी मिली।
इस पर डॉ. जैन ने कहा —
“यह संरचना मंदिर नहीं लगती, बल्कि प्राचीन मानव सभ्यता की किसी बस्ती के संकेत स्थल या शिखर जैसी प्रतीत होती है। संभवतः यह दूर से आने वाले लोगों को मार्गदर्शन देने या पहचान के लिए बनाई गई होगी।”
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजी जाएगी रिपोर्ट
डॉ. अमित राय जैन ने बताया कि वे इस संपूर्ण सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भेजेंगे।
साथ ही वे संस्कृति मंत्रालय से मिलकर प्रयास करेंगे कि खंडवारी वनक्षेत्र को संरक्षित पुरातात्विक स्थल घोषित किया जाए और यहां वैज्ञानिक उत्खनन कार्य प्रारंभ हो।
उन्होंने कहा कि –
“यह खोज बागपत जनपद को भारतीय पुरातात्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिला सकती है।”
स्थानीय लोग भी हुए उत्साहित
इस खोज के बाद सिसाना, खेकड़ा और आस-पास के गांवों में उत्सुकता का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस स्थल को संरक्षित किया गया, तो यह न केवल इतिहासकारों और शोधार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बागपत के लिए वरदान साबित होगा।



