बागपत
गांव की उन्नति मेरे परिवार की जिम्मेदारी है” — सुमन दांगी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ग्राम लुहारी की सरल और कर्मठ महिला सुमन दांगी, पत्नी मुकेश दांगी, अब अपने गांव के विकास की नई कहानी लिखने के लिए तैयार हैं।
समाजसेवा की भावना और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की सोच के साथ वे प्रधान पद की भावी प्रत्याशी के रूप में गांव की जनता के बीच लगातार संवाद बना रही हैं।
प्रश्न 1: सुमन जी, ग्राम राजनीति में आने की प्रेरणा कहां से मिली?
उत्तर:
मेरे पति मुकेश दांगी और मेरा परिवार हमेशा से समाजसेवा में सक्रिय रहा है।
गांव की महिलाओं की तकलीफें, टूटी सड़कें, नल की समस्या और बेरोजगार युवाओं की चिंता मुझे भीतर तक महसूस होती थी।
मुझे लगा कि सिर्फ बात करने से नहीं, जिम्मेदारी लेने से बदलाव आता है, इसलिए मैंने प्रधान पद के लिए आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
प्रश्न 2: अगर आप प्रधान बनती हैं, तो आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
उत्तर:
मेरा सबसे पहला लक्ष्य गांव की बुनियादी सुविधाओं को सुधारना है —
हर घर में स्वच्छ पेयजल,
बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था,
युवाओं के लिए रोजगार-प्रशिक्षण कार्यक्रम,
और किसानों के लिए सिंचाई की ठोस व्यवस्था।
इसके साथ मैं महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) शुरू कराना चाहती हूं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रश्न 3: एक महिला उम्मीदवार के रूप में गांव की प्रतिक्रिया कैसी मिल रही है?
उत्तर:
बहुत अच्छा समर्थन मिल रहा है।
लोग अब समझते हैं कि महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित नहीं, बल्कि गांव के विकास की भागीदार हैं।
गांव की बेटियां और बहुएं जब जिम्मेदारी उठाती हैं, तो ईमानदारी और संवेदना दोनों साथ लाती हैं।
मैं खुद को गांव की “बेटी” मानती हूं, और गांव के हर व्यक्ति को अपना परिवार।
प्रश्न 4: आपके अनुसार असली नेता कौन होता है?
उत्तर:
जो सुनता है, समझता है और फिर समाधान करता है — वही असली नेता है।
मेरा मानना है कि कुर्सी से नहीं, सेवा से सम्मान मिलता है।
मैं चाहती हूं कि लोग मुझे प्रधान नहीं, सेवक सुमन दांगी के नाम से याद करें।
प्रश्न 5: अंत में अपने ग्रामवासियों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर:
> “गांव तभी बदलेगा जब हम सब एक साथ सोचेंगे और मिलकर काम करेंगे।
मेरी राजनीति का आधार जाति या वर्ग नहीं, विकास और विश्वास है।
आप सबका साथ ही मेरी ताकत है।”



