आधे से अधिक परीक्षार्थियों ने छोड़ी पीसीएस-प्री परीक्षा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस प्री परीक्षा नामांकित परीक्षार्थियों में से आधे से अधिक ने छोड़ दिया। कई केंद्रों पर परीक्षार्थियों की उपस्थिति 40 से 45 प्रतिशत तक ही रही। पंजीकृत 6202 परीक्षार्थियों में से कुल 2878 परीक्षार्थी ही परीक्षा में शामिल हुए। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में परीक्षार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार को जिले के 15 केंद्रों पर पीसीएस-प्री परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी की गई थी। परीक्षा के दौरान जोनल, सेक्टर व स्टेटिक मजिस्ट्रेट के रूप में ड्यूटी में लगे प्रशानिक अधिकारी लगातार भ्रमणशील रहे।
परीक्षा की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की गई। जांच के बाद ही दिया गया प्रवेश परीक्षार्थियों को परीक्षा से एक घंटे पूर्व केंद्र पर पहुंचने का निर्देश दिया गया था। जांच टीम द्वारा विधिवत परीक्षण के बाद ही परीक्षार्थियों को प्रवेश की अनुमति दी गई। जिसके चलते देर से केंद्र पर पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुरक्षा का रहा पुख्ता इंतजाम जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया था। प्रत्येक केंद्र पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात रहा। सीओ व एसओ लगातार केंद्रों का जायजा लेते रहे। डीआईओएस डॉ. राजेश द्विवेदी ने बताया कि परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न हुई। परीक्षा के दौरान किसी भी केंद्र से नकल या अनुशासनहीनता की कोई शिकायत नहीं प्राप्त हुई। पेपर सरल होने से परीक्षार्थियों के चेहरों पर खुशी जीजीआईसी अमेठी से परीक्षा देकर निकली बाराबंकी जिले की निवासी निधि वर्मा ने बताया उनका यह दूसरा वर्ष है। इस बार पेपर उन्होंने अच्छी तरीके से दिया है और सफल होने की उम्मीद है। आरआरपीजी कॉलेज में परीक्षा देने आई लखनऊ की शिवानी दीक्षित ने बताया कि वह दूसरी बार परीक्षा दे रही हैं। पहली बार की अपेक्षा इस बार का पेपर सरल है। उनका पेपर अच्छा हुआ है। बाराबंकी की अर्चना ने बताया कि उनका पहली बार पेपर हुआ है। जो अच्छा हुआ है। बाराबंकी की सुधा, प्राची और अंजू ने भी पेपर अच्छा होने की बात बताई। वहीं आरआरपीजी कॉलेज व जीजीआईसी टीकरमाफी में परीक्षा में ड्यूटी दे रहे शिक्षकों के मानदेय वितरण को लेकर भी कहासुनी हुई।



