बरेली

आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार

शासन तक पहुंचा मामला, बरेली के डीपीओ को नोटिस जारी

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पदों की भर्ती में भ्रष्टाचार का मामला शासन तक पहुंच गया है। अब बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के निदेशक ने जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) मनोज कुमार को नोटिस जारी कर सात बिंदुओं पर सात दिनों के अंदर जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
डीएम ने लापरवाही, शिथिलता, उदासीनता और मनमर्जी के आरोप में डीपीओ के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसी का संज्ञान लेकर निदेशक सरनीत कौर ब्रोका ने डीपीओ को नोटिस जारी किया है। जारी नोटिस के मुताबिक, पिछले साल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के रिक्त 311 पदों के सापेक्ष 301 पदों पर भर्ती हुई थी। डीपीओ ने इसकी निगरानी नहीं की। इस वजह से भर्ती से जुड़ीं 168 शिकायतें आईं। इनमें 21 सही पाई गईं। 21 चयन निरस्त करने पड़े। तीन लेखपाल निलंबित हुए। सात लेखपालों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई।
जिला समन्वयक की समाप्त हुई थी संविदा
जिला समन्वयक धर्मपाल के विरुद्ध रिश्वत लेने की पुष्टि होने पर सात जुलाई को उसकी संविदा समाप्त की गई। सीडीपीओ श्रीकृष्ण चंद्र के रिश्वत लेने का वीडियो वायरल हुआ। सीडीओ की रिपोर्ट पर उसे 16 अप्रैल को निलंबित किया गया। भर्ती प्रक्रिया डीपीओ की निगरानी में हुई, लेकिन इन्होंने घोर लापरवाही बरती। न उन्होंने निरीक्षण की रिपोर्ट दी, न ही सीडीपीओ की निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध कराई।
निदेशालय चार व सीडीओ दे चुके 11 नोटिस
निदेशक ने डीपीओ से कहा है कि कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों को कुपोषण मुक्त करना संभव नहीं हो पाया है। इस मामले में पूर्व में सीडीओ ने डीपीओ को विभिन्न तारीखों में 11 बार कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं। निदेशालय से भी वर्ष 2024 में 21 जून को चेतावनी, 16 व 19 जुलाई एवं 26 सितंबर 2025 को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। फिर भी डीपीओ ने कार्यशैली में सुधार नहीं किया।
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