बालाघाट

कलम चली तो सरपंचो ने साजिश का बुन दिया जाल ?

पंचायती सिस्टम के खुलासे से सरपंचो मे बढ़ी बौखलाहट ?

भ्रष्टाचार उजागर करने पर पत्रकार को बदनाम करने की साजिश ?
कई सरपंचों के खिलाफ गंभीर शिकायत, उच्चस्तरीय जांच की मांग !
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बालाघाट। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तब सबसे अधिक परखा जाता है, जब सच लिखने वाले हाथों को झूठे आरोपों से बांधने की कोशिश होती है। हालिया प्रकरण में एक निष्पक्ष पत्रकार को साजिशन बदनाम करने का प्रयास न केवल व्यक्ति पर, बल्कि पत्रकारिता की आत्मा पर प्रहार है। जो कलम भ्रष्टाचार उजागर करे, वही यदि प्रताड़ना सहे तो यह व्यवस्था के लिए चेतावनी है। आवश्यक है कि सच बोलने वालों की सुरक्षा हो न कि उन्हें डराया जाए। क्योंकि निर्भीक पत्रकार ही समाज की आँख, कान और अंतरात्मा होता है। ऐसा हम इसलिये कह रहे है कि क्योकि हाल में ही एक शिकायती मामले ने पत्रकार जगत की साख पर कीचड़ उछाल दिया है।
               दरअसल, बालाघाट जिले की जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। किरनापुर ब्लॉक सरपंच संघ ने गत दिवस जनसुनवाई में अर्जी लगाकर तीन पत्रकारो पर सीएम हेल्पलाईन में फर्जी शिकायते कर ब्लैकमेलिंग करने व झूठी खबर प्रकाशन करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की। जिसमें प्रमुख रूप से नायक दर्पण अखबार के जिला ब्युरो ग्राम कोसमी निवासी संजय अजीत का सर्वप्रथम जीक्र किया। साथ ही अन्य दो पत्रकारो के नामो का भी जीक्र करके तीन पत्रकारो पर कथित आरोप लगाये।
                  सरंपच संघ द्वारा की गई शिकायत के बाद पत्रकार संजय अजीत ने भी कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है और सरपंचो पर आरोप लगाया है कि उनके द्वारा पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। जिसे नायक दर्पण अखबार के जरिये उजागर करने पर संबंधित अखबार के पत्रकार ( जिला ब्युरो संजय अजीत) को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। सीएम हेल्पलाईन में शिकायत कर पत्रकार द्वारा ब्लैकमेल करने का दावा तो किया गया, लेकिन मीडिया के समक्ष प्रमाण नही सौंपे।
                  अपने शिकायती पत्र में पत्रकार संजय अजीत ने प्रकाश बाहे (सरपंच/सरपंच संघ अध्यक्ष, सुसवा), लक्ष्मण बेले सहित बेलगांव, देवगांव, मौदा, पिपलगांवखुर्द, मंगोलीकला, धडी, दत्ता, बुढी एवं अकोला ग्राम पंचायतों के सरपंचों को अनावेदक बनाते हुए आरोप लगाए हैं। आवेदक पत्रकार संजय अजीत ने शिकायत पत्र में दावा किया है कि संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंचो ने अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 2023 से 2025 के बीच मनरेगा से कराए गए तालाब निर्माण, सुदूर सड़क निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताएँ की हैं। फर्जी बिल, फर्जी मस्टर रोल और कागजी भुगतान दिखाकर शासकीय राशि का गबन किया गया। साथ ही 5वें एवं 15वें वित्त आयोग की राशि के दुरुपयोग भी किया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायतों में खरीदी गई आरओ वाटर मशीनों में वास्तविक कीमत से अधिक के फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित की गई, तथा अन्य मदों की राशि का भी दुरुपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त टैक्स वसूली से प्राप्त धनराशि में भी अफरा-तफरी कर गबन किया गया है।
                        पत्रकार संजय अजीत का कहना है कि उन्होंने इन कथित भ्रष्टाचार मामलों को उजागर करने हेतु नायक दर्पण समाचार पत्र में खबरें प्रकाशित कर पंचायत प्रतिनिधियों की कथनी-करनी सामने लाई है। जिससे बौखलाकर संबंधित सरपंचो के द्वारा 10 फरवरी 2026 को कलेक्टर के समक्ष पत्रकारो के खिलाफ झूठी शिकायत कर पत्रकार जगत की छवि को ही धूमिल करने का प्रयास किया गया। फिलहाल पत्रकार संजय अजीत ने भी प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित सरपंचो की पंचायतो में मनरेगा, वित्त आयोग, कर वसूली तथा अन्य निर्माण कार्यों के भुगतान, बिल, मस्टर रोल और तकनीकी स्वीकृतियों की बिंदुवार पड़ताल की जाए। दोष सिद्ध होने पर संबंधित के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही की जायें।
                       इधर, उक्त मामला सामने आने के बाद जनपद क्षेत्र में पंचायत कार्यों की पारदर्शिता को लेकर चचार्एँ तेज हो गई हैं। हालांकि आरोपों पर संबंधित सरपंचों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में पंचायतों में हुए कार्यों की उच्चस्तरीय जांच होती है या मामला कागजों तक सीमित रह जाता है। फिलहाल, इन शिकायती सिलसिले ने स्थानीय प्रशासन, पत्रकार जगत में हलचल जरूर मचा दी है।
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