जयपुर

टूटी सड़कों और जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, चार हफ्ते में मांगा सुधार प्लान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जयपुर। मानसून के दौरान जयपुर में टूटी सड़कों और जलभराव की गंभीर स्थिति पर राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए कड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की एकलपीठ ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह संज्ञान लिया और कहा कि शहर की मौजूदा स्थिति गुलाबी नगरी की अंतरराष्ट्रीय छवि और गौरव को नुकसान पहुंचा रही है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियां
अदालत ने अपने आदेश में कहा: “अब समय आ गया है कि विचार किया जाए कि जयपुर अपनी सुंदरता और विरासत के लिए जाना जाने वाला गौरवशाली गुलाबी शहर बना रहेगा, या फिर अपनी ही बुनियादी संरचना की समस्याओं के चलते एक डूबते शहर में बदल जाएगा।” हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो जयपुर अपनी ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी की पहचान खो देगा।
अदालत ने सरकार और नगर प्रशासन से मांगा जवाब हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं:
मुख्य सचिव
प्रमुख शासन सचिव (UDH)
जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) आयुक्त
जयपुर नगर निगम हेरिटेज और ग्रेटर आयुक्त
नोटिस में पूछा गया है:
शहर की सड़कों की मरम्मत का समयबद्ध प्लान क्या है?
जलभराव और सीवरेज समस्या खत्म करने की योजना क्या है?
सड़क निर्माण में घटिया सामग्री और तकनीक क्यों अपनाई जाती है?
बिना प्रभावी निरीक्षण के बिल पास करने वाले अधिकारियों के नाम बताएं।
हाईकोर्ट की प्रमुख चिंता
हर मानसून में जलभराव, बाढ़ और निकासी की समस्या खराब सड़कें, जो करदाताओं के पैसे से बनने के अगले दिन ही टूट जाती हैं
घटिया निर्माण और निरीक्षण में लापरवाही नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और दैनिक जीवन पर नकारात्मक असर हाईकोर्ट ने कहा कि चार हफ्ते में विस्तृत कार्ययोजना पेश की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
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