बहराइच

 नम आंखों के साथ खुद ही उजाड़ रहे अपना आशियाना। बाढ़ ने किया मजबूर

महसी के जानकी नगर में बाढ़ के पानी में डूबे मकान व झोपड़ी में बैठे ग्रामीण। -स्रोत : ग्रामीण

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बहराइच। जिले में बाढ़ और कटान की दोहरी मार से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। सरयू उफान पर है, इसका रौद्र रूप अब गांवों को लील रहा है। जनपद के महसी तहसील के जानकीनगर गांव समेत कई जगहों पर लोग गृहस्थी का सामान समेटकर खुद ही अपना घर उजाड़ने को मजबूर हो रहे हैं। महसी के जानकीनगर और शिवपुर के पसियनपुरवा गांवों में तेज कटान की वजह से जमीन खिसक रही है। कई घरों की नींव पानी में समा गई है। ग्रामीण जान बचाने के लिए अपना आशियाना उजाड़कर ऊंचे इलाकों की तरफ भाग रहे हैं। एक ओर नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासन के राहत इंतजाम अब भी जरूरत से कम साबित हो रहे हैं।
एल्गिन ब्रिज पर सरयू खतरे के निशान से 47 सेमी और महसी के घूर देवी में 37 सेमी ऊपर बह रही है। बृहस्पतिवार दोपहर तक नदी में 3 लाख 27 हजार 344 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि गांवों में बने पंचायत भवन और स्कूल भी पानी से घिर गए हैं। गांवों में पानी भर जाने के कारण लोग तटबंध और ऊंची सड़कों के किनारे शरण ले रहे हैं। कई गांवों के लोग अब पूरी तरह विस्थापित हो चुके हैं। खेत-खलिहान सब डूब चुके हैं। जानवरों के लिए चारे-पानी का भी संकट खड़ा हो गया है।
मोटर बोट से बाढ़ प्रभावित गांव पहुंचे डीएम
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र के साथ महसी तहसील के प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। एनडीआरएफ की मोटर बोट से डीएम ने जानकीनगर, जोधेपुरवा, कोढ़वा और टंच गांवों का दौरा किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि लगातार गश्त और नजर रखी जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाई जा सके।
चार बोट लगाकर शुरू हुई ग्रामीणों की शिफ्टिंग
प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने चार बोटों की व्यवस्था की है। जानकीनगर के लोग अब पूरे सीतापुर गांव में बनाए गए शरणालय में शिफ्ट किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शरणालयों में रहने वालों के लिए भोजन, पीने के पानी, रोशनी और अन्य जरूरी सुविधाओं की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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