अंतरराष्ट्रीय

देखते रह गए ट्रंप, चीन पहुंचकर जयशंकर ने पहले की उपराष्ट्रपति से मुलाकात

फिर दे डाला गजब का बयान!

 

बीजिंग : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी शुरुआती टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए मेरी यात्रा के दौरान आपसे मिलना खुशी की बात है। आपको बता दें कि जयशंकर चीन के शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन का दौरा कर रहे हैं।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस वक्त चीन दौरे पर हैं। सिंगापुर दौरे के बाद जयशंकर सीधा चीन पहुंचे जहां उनकी मुलाकात उपराष्ट्रपति हान झेंग से हुई। चीन के उपराष्ट्रपति के साथ मुलाकात की तस्वीर को शेयर करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज बीजिंग पहुंचने क बाद उपराष्ट्रपति हान झेंग से मिलकर खुशी हुई। जयशंकर ने लिखा कि शंघाई सहयोग संगठन में चीन की अध्यक्षता को लेकर समर्थन जताया। दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार हुआ। उम्मीद है कि मेरी इस यात्रा के दौरान बातचीत सकारात्मक बनी रहेगी। इस मीटिंग के दौरान जयशंकर ने कहा कि पिछले अक्टूबर में कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से दोनों देशों के संबंधों में सुधार हुआ है। मुझे यकीन है कि इस दौरे के दौरान हमारी चर्चा से ये सकारात्मकता बनी रहेगी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी शुरुआती टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए मेरी यात्रा के दौरान आपसे मिलना खुशी की बात है। आपको बता दें कि जयशंकर चीन के शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन का दौरा कर रहे हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 2020 में हुए सैन्य गतिरोध और इसके पश्चात दोनों देशों के संबंधों में आए गंभीर तनाव के बाद जयशंकर की यह पहली चीन यात्रा है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस यात्रा में मेरी चर्चाएं इसी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी। पिछले कुछ महीनों में, भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं, जो जून 2020 में दोनों सेनाओं के बीच घातक झड़पों के बाद गंभीर रूप से बिगड़ गए थे।

विदेश मंत्री ने भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली की भारत में भी व्यापक रूप से सराहना की जा रही है। हमारे संबंधों के निरंतर सामान्य होने से पारस्परिक रूप से लाभकारी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। आज हम जिस अंतरराष्ट्रीय स्थिति में मिल रहे हैं, वह बहुत जटिल है। पड़ोसी देशों और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के बीच विचारों और दृष्टिकोणों का खुला आदान-प्रदान बहुत महत्वपूर्ण है। मैं इस यात्रा के दौरान ऐसी चर्चाओं की आशा करता हूं। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने उप राष्ट्रपति झेंग से बातचीत में एससीओ की चीन की अध्यक्षता के प्रति भारत का समर्थन व्यक्त किया।

जयशंकर ने कहा कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार का संज्ञान लिया। और यह विश्वास जताया कि मेरी यात्रा के दौरान बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी। जयशंकर की इस यात्रा से तीन सप्ताह से भी कम समय पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीनी बंदरगाह शहर किंगदाओ की यात्रा की थी। चीन शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का वर्तमान अध्यक्ष है, और इस नाते इस समूह की बैठकों की मेजबानी कर रहा है।

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