अलवर

सावन में मंदिर के पास बिक रही शराब, प्रशासन की दोहरी नीति पर उठे सवाल,,

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
अलवर जैसे धार्मिक नगरी में प्रशासन की नीति अब सवालों के घेरे में है। सावन के पवित्र माह में, जब मंदिरों में भक्ति गीत गूंज रहे हैं, उसी समय मंदिरों के ठीक सामने शराब की दुकानें खुली नज़र आ रही हैं। यह नजारा न केवल धार्मिक आस्था पर आघात कर रहा है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी चोट पहुँचा रहा है।
शहर के बीचोबीच स्थित हॉप सर्कस, जिसे अलवर का हृदय स्थल कहा जाता है, अब धार्मिक और ऐतिहासिक कारणों से नहीं, बल्कि इसके पास स्थित शराब की दुकान के कारण चर्चाओं में है। श्रद्धालु, पर्यटक और बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोग असहज महसूस कर रहे हैं। मंदिर में पूजा करने आए लोगों को जब शराब की गंध और माहौल का सामना करना पड़ता है, तो यह हमारे सामाजिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
अलवर में हजारों परिवार ऐसे हैं जिनके जीवन को शराब ने बर्बाद कर दिया है, लेकिन फिर भी प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। न मंदिरों की मर्यादा देखी जा रही है, न बाज़ारों की गरिमा। अवैध और वैध दोनों प्रकार की शराब की बिक्री बेधड़क जारी है।
प्रशासन एक तरफ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करता है और दूसरी तरफ मंदिरों के सामने शराब के ठेके खोलकर उसकी गरिमा को नष्ट करता है। आखिर यह कैसी नीति है? क्या धर्म और नशे का यह संगम समाज को गर्त की ओर नहीं ले जाएगा?
अब समय आ गया है कि जनता और सामाजिक संगठन इस दोहरी नीति के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें।
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