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उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले BRS-BJD का बड़ा एलान

मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे दोनों दल

 

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद के चुनाव से ठीक एक दिन पहले बीआरएस और बीजू जनता दल ने चौंकाने वाला एलान किया है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने कहा कि उनकी पार्टी उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगी। इसी तरह बीजद ने भी ऐसी ही घोषणा की है।

आज देश के नए उपराष्ट्रपति के नाम का एलान हो जाएगा। इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी सी. पी. राधाकृष्णन और विपक्ष के बी सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। इस बीच, दो राजनैतिक दलों ने कल होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने का एलान किया है। इन दलों में बीआरएस और बीजू जनता दल शामिल हैं। बता दें कि जगदीप धनखड़ के अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 21 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था, जिस कारण रिक्त हुए उपराष्ट्रपति पद के लिए मध्यावधि चुनाव कराया जा रहा है। अब कल यानी नौ सितंबर को यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव से ठीक एक दिन पहले बीआरएस और बीजू जनता दल ने चौंकाने वाला एलान किया है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने कहा कि उनकी पार्टी उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगी। इसी तरह बीजद ने भी ऐसी ही घोषणा की है। बीजद के नेता सस्मित पात्रा ने कहा कि बीजू जनता दल मंगलवार को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने फैसला किया है कि पार्टी के सांसद उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान से दूर रहेंगे। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) के सदस्यों और सांसदों से परामर्श के बाद यह फैसला लिया है। पात्रा ने कहा कि हमारा पूरा ध्यान राज्य और उसके 4.5 करोड़ लोगों के विकास पर है।

बीआरएस भी उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगी- वहीं, बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगी। तेलंगाना के किसानों में यूरिया की कमी को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों पर आरोप लगाते हुए रामाराव ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस कमी के मुद्दे को सुलझाने में फेल रही हैं।

बीआरएस नेता ने कहा कि यूरिया की कमी इतनी ज्यादा है कि कतारों में इंतजार करते हुए किसानों के बीच हाथापाई हो रही है। ऐसे में हम मतदान से दूर रहेंगे। हम इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। आगे उन्होंने कहा कि अगर उपराष्ट्रपति चुनाव में नोटा का विकल्प उपलब्ध होता, तो बीआरएस इसका इस्तेमाल कर सकती थी।

इन दलों ने अभी तक साफ नहीं की है स्थिति

उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के बीच सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्ष के इंडिया गठबंधन दोनों के बीच कड़ी टक्कर चल रही है। यह एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच एक तरह से शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। बीजद और बीआरएस के चुनाव से हटने के बाद भी अभी तक अकाली दल, जेडपीएम और वीओटीटीपी के एक-एक सांसद और तीन निर्दलीय सांसदों ने अभी तक अपनी पसंद का स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।

एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी जीत लगभग तय

उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर संसद में सांसदों की संख्या को देखें तो एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को बहुमत मिलने के स्पष्ट संकेत हैं। वर्तमान में मतदाताओं की संख्या 781 है और सात सीटें रिक्त हैं, जिनमें शिबू सोरेन का नाम भी शामिल है, जिनका मतदाता सूची तैयार होने के बाद निधन हो गया था।

राधाकृष्णन बनाम सुदर्शन रेड्डी का मुकाबला

इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। राधाकृष्णन भाजपा संगठन के वफादार और विश्वसनीय चेहरे माने जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, सुदर्शन रेड्डी न्यायपालिका में अपनी ईमानदार और निष्पक्ष छवि के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उपराष्ट्रपति पद का यह चुनाव राजनीति बनाम न्यायपालिका के बीच भी देखा जा रहा है।

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