जालौन

यमुना नदी का सीना छलनी

सिमरा शेखपुरा घाट पर अवैध बालू खनन का खुला खेल

ओवरलोडिंग का खेल चरम पर खनन माफिया सक्रिय
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जालौन  : जनपद जालौन में यमुना नदी की तलहटी पर अवैध बालू खनन का गंभीर और चिंताजनक मामला उजागर हुआ है। यमुना पट्टी क्षेत्र अंतर्गत तहसील कालपी के सिमरा शेखपुरा स्थित गाटा संख्या 117/1, खंड संख्या-1 में संचालित बालू घाट पर खनिज नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह घाट श्री बालाजी एसोसिएट के पार्टनर सुशील कुमार सिंह पुत्र बेचन सिंह निवासी गजराज नगर, बिल्ली मारकुंडी, तहसील रॉबर्ट्सगंज, जनपद सोनभद्र के नाम से स्वीकृत बताया जा रहा है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार इस खंड को 11 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 8 दिसंबर 2025 से 7 दिसंबर 2030 तक खनन की अनुमति दी गई है। हालांकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार खंड संचालक द्वारा उत्तर प्रदेश खनिज नियमावली 1963 और पर्यावरणीय मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर यमुना नदी का स्वरूप बदला जा रहा है। नियमों में स्पष्ट है कि खनन सीमित गहराई निर्धारित मात्रा और सेमी मैकेनाइज विधि से ही किया जाना चाहिए लेकिन यहां यमुना का सीना बेरहमी से छलनी किया जा रहा है। दिन-रात भारी-भरकम पोकलेन मशीनों की गड़गड़ाहट से यह साफ जाहिर होता है कि अवैध रूप से पूर्णत: मैकेनाइज खनन किया जा रहा है। जबकि जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार उत्तर प्रदेश में बालू खनन केवल सेमी मैकेनाइज तरीके से ही अनुमन्य है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों के अनुपालन में मुस्तकीम बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश मामले में स्पष्ट किया गया है कि खनन में केवल वही मशीनें प्रयोग की जा सकती हैं जिनका बकेट साइज एक क्यूबिक मीटर तक सीमित हो और जिनमें जिम चेन लगी हो। इसके बावजूद पट्टा धारक द्वारा भारी पोकलेन मशीनों से यमुना नदी की तलहटी को खोदकर पर्यावरणीय विनाश किया जा रहा है।
स्थिति यह है कि ट्रकों में क्षमता से कई गुना अधिक बालू भरकर खुलेआम ओवरलोडिंग की जा रही है। बालू से लदे ट्रक राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन-रात फर्राटा भरते देखे जा सकते हैं जिससे सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। कानपुर तक जाने वाले मार्ग की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है लेकिन हैरानी की बात यह है कि जनपद जालौन का परिवहन विभाग इस पूरे अवैध कारोबार से अनजान बना बैठा है या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे हुए है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खंड संचालक जल्दी अमीर बनने की चाह में यमुना नदी की निर्मम लूट में लगा हुआ है। अवैध खनन से न केवल नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है बल्कि आसपास के गांवों में भू-क्षरण, जलस्तर में गिरावट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि खनन विभाग,परिवहन विभाग और जिला प्रशासन आखिर कब तक इस अवैध खनन पर मौन साधे रहेगा? क्या नियम केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर यमुना नदी को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे यह आने वाला समय ही बताएगा।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button