झुंझुनू

देश के प्रथम श्रम मंत्री बाबू जगजीवन राम और प्रथम महिला बैरिस्टर कार्नेलिया सोराबजी की पुण्यतिथि मनाई

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
झुंझुनूं सूरजगढ़। आदर्श समाज समिति इंडिया के कार्यालय सूरजगढ़ में भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष देश के प्रथम श्रम मंत्री, महान स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य, केंद्रीय संचार मंत्री, हरित क्रांति के प्रणेता केंद्रीय खाद्य एवं कृषि मंत्री, परिवहन एवं रेल मंत्री, दलितों के मसीहा प्रथम दलित उप-प्रधानमंत्री, भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 की ऐतिहासिक जीत के हीरो तत्कालीन रक्षा मंत्री, आधुनिक भारत के राष्ट्र निर्माताओं में से एक देश के महान राजनेता बाबू जगजीवन राम और देश की प्रथम महिला बैरिस्टर कार्नेलिया सोराबजी की पुण्यतिथि मनाई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन संघर्ष को याद किया। बाबू जगजीवन राम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी ने कहा- दलित परिवार में जन्म लेकर भारतीय राजनीति के क्षितिज पर छाने वाले महान राजनेता बाबू जगजीवन राम का राष्ट्र के निर्माण में विशेष योगदान है। लगभग 50 वर्षों के संसदीय जीवन में राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण और निष्ठा बेमिसाल है। उनका संपूर्ण जीवन राजनीतिक, सामाजिक सक्रियता और विशिष्ट उपलब्धियों से भरा हुआ है। बाबू जगजीवन राम को भी अपने जीवन में कई बार जातिवाद का दंश झेलना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी किसी जाति या धर्म के खिलाफ़ कोई टिप्पणी नहीं की और उन्होंने अपने जीवन काल में कभी किसी जाति या धर्म के खिलाफ़ नफरत नहीं फैलाई। और सबसे बड़ी बात ये है कि उनको धर्म परिवर्तन के लिए कई बार प्रलोभन देने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने अपने जीवन में धर्म परिवर्तन नहीं किया और ना ही किसी दलित समाज के व्यक्ति को धर्म परिवर्तन की सलाह दी। ऐसे महापुरुष को हम नमन करते हैं। प्रथम महिला बैरिस्टर कार्नेलिया सोराबजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए धर्मपाल गाँधी ने बताया कि भारत की पहली महिला बैरिस्टर बनने का गौरव कार्नेलिया सोराबजी ने आजादी से बहुत पहले हासिल किया था। कार्नेलिया सोराबजी बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाली पहली युवती थी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई करने वाली पहली महिला थी। कार्नेलिया सोराबजी की बदौलत ही भारत और ब्रिटेन में महिलाओं को वकालत करने का अधिकार मिला। वे बैरिस्टर होने के साथ एक समाज सुधारक और लेखिका भी थी। 6 जुलाई 1954 में उन्होंने लंदन में दुनिया को अलविदा कहा। 2012 में लंदन के लिंकन इन में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया। महान आत्मा को हम नमन करते हैं। इस मौके पर आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी, प्रताप सिंह तंवर, दरिया सिंह डीके, रणवीर सिंह, राकेश, सुनील गाँधी व अन्य लोग मौजूद रहे।
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