गाजियाबाद
शासन के आदेश नगर पालिका में ‘हवा-हवाई’!
आईजीआरएस में पानी मांगा, जवाब में पार्क बंद होने की कहानी सुना दी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : शासन भले ही आईजीआरएस को जनता की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण समाधान का सबसे बड़ा मंच बताता हो, लेकिन नगर पालिका परिषद लोनी में कुछ अधिकारियों ने शायद इसे “कल्पना लोक शिकायत निस्तारण सेवा” समझ लिया है। यहां शिकायत कुछ और होती है और जवाब कुछ और ही तैयार कर दिया जाता है।
मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या 400014026038014 दिनांक 08 जून 2026 का है। नगरपालिका के वार्ड-33 निवासी पवन त्यागी ने अपने क्षेत्र में पेयजल की समस्या के समाधान की मांग करते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उम्मीद थी कि जांच अधिकारी मौके पर जाएंगे, पानी की व्यवस्था देखेंगे और समस्या का समाधान खोजेंगे। लेकिन लगता है जांच अधिकारी रिपोर्ट लिखते समय शिकायत का विषय पढ़ना भूल गए या पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा गया।
जांचकर्ता दिगम्बर सिंह भंडारी, फिटर, नगर पालिका परिषद लोनी ने शिकायत को अपनी रिपोर्ट में ऐसा मोड़ दिया कि शिकायतकर्ता भी पढ़कर हैरान रह गया। रिपोर्ट में उल्लेख करते हुए बताया गया कि पवन त्यागी ने महाराणा प्रताप पार्क बंद किए जाने के संबंध में जानकारी मांगी है। इसके बाद शिकायत की पूरी कहानी पार्क, स्थानीय विवाद, संवेदनशील स्थिति और पार्क के अस्थायी रूप से बंद किए जाने पर केंद्रित रही।
अब सवाल यह है कि पानी की समस्या कब पार्क तक पहुंच गई और नल से बहता पानी झूले और फिसलपट्टी में कब बदल गया, यह रहस्य शायद जांच अधिकारी ही ठीक से बता सकते हैं।
मौके पर जांच या कार्यालय में कल्पना?
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि शिकायतों की गुणवत्ता परक और पारदर्शी जांच के लिए मौके पर पहुंचकर सत्यापन किया जाए। लेकिन इस मामले में रिपोर्ट देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जनाब ने मौके पर जाने की आवश्यकता ही महसूस नहीं की गई। शिकायत पेयजल की थी और निस्तारण पार्क विवाद पर कर दिया गया।
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि यदि इसी रफ्तार से जांच होती रही तो कल सड़क की शिकायत पर स्ट्रीट लाइट की रिपोर्ट और नाली की शिकायत पर सामुदायिक भवन का जवाब मिल सकता है।
पुरानी स्याही सूखी नहीं, नई कहानी तैयार
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में जेई नीलम द्वारा आईजीआरएस शिकायत में दी गई ग़लत जांच आख्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और रिपोर्ट ने पालिका में शिकायत निस्तारण की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चर्चा यह भी है कि कुछ अधिकारी आईजीआरएस को जनसमस्याओं के समाधान का मंच कम और “रिपोर्ट पूरी करो, फाइल बंद करो” अभियान ज्यादा समझ बैठे हैं।
अब निगाहें उच्च अधिकारियों पर
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या इस मामले में जांच अधिकारी और संबंधित एल-1 अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी, या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह सरकारी अलमारी में आराम फरमाएगी?
फिलहाल जनता यही पूछ रही है कि जब पानी की शिकायत का समाधान पार्क की कहानी से होने लगे, तब शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का क्या होगा?
व्यंग्य यही कहता है— “लोनी पालिका में आईजीआरएस का नया फॉर्मूला चल पड़ा है, शिकायत पढ़ो मत, कहानी गढ़ो और निस्तारण चढ़ाओ!”



