बेतुल

बैतूल विचार सोचता, लिखता, बोलता हूं तो जन प्रतिनिधि कहते हैं चुप रहा करना बे _यही लोकतंत्र में आवाज का कुचला जाना 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल विचार पढ़िए, सोचिए, समझिए कहा  है आपकी वोट की ताकतआपको बताया जाता है कि आपकी वोट  में ताकत है तो आपकी वोट की ताकत  है  किधर। आपकी वोट की  ताकत तो इसमें निहित है  की  आपके चुने हुए जन प्रतिनिधियो के  करोड़ों के बंगले निर्मित हो  रहे है, और वोट   डालने आप मतदाता  दूषित पानी पीकर मरने पर मजबूर  हैं। आपकी वोट की ताकत से राजनेताओं को  सुविधाएं ऐशो आराम मिलने लगता हैं और मतदाता  नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हो जाता हैं। आपकी  सारी  ताकत वोट के माध्यम से राजनेताओं  को  स्थानांतरित हो जाती हैं ? आखिर क्यों और कैसे? मतदाता की वोट से चुने  स्पीकर और प्रतिपक्ष का नेता 4 करोड़ से अधिक की लागत से बने बंगले में रहने का अधिकारी बन जाता हैं, तो  वोट  डालने वाला मतदाता को भी 4  करोड़  के बंगले में  रहने का हकदार  होना चाहिए? आखिर वह क्यों  खुले  आसमान में रहने पर मजबूर है और इसलिए भारत में  लोकतंत्र केवल एक मृग मरीचिका की  भांति है जिसमें स्वर्ण  मृग दौड़ते तो दिखता है लेकिन वास्तव में वह राक्षस मारीच ही होता हैं जो जनता रूपी  सीता का  अपरहण करने के लिए स्वर्ण का रूप धर उसे  बार बार चुनावो में छलते  रहता है।
आप देखिए  सुविधाए पाने के लिए पक्ष विपक्ष सब एक है। करोड़ों के बंगले में हमारी वोट की ताकत से राजनेताओं को आलीशान , वैभवशाली शरणस्थली  मिल जाती  हैं और हमें लेने के लिए साफ हवा नहीं है, पीने के लिए साफ पानी नहीं है, खाने के लिए साफ भोजन नहीं है, पढ़ने के लिए सस्ते शैक्षणिक संस्थान नहीं है, स्वास्थ के लिए उच्च तकनीक के सस्ते अस्पताल नहीं है? पॉलीथिन प्लास्टिक से धरती नदी भरी पड़ी है। हमारी कौन सी वोट की ताकत है सिर्फ लाडली बहना के 1500 रुपए में  पाने तक में मेरी वोट की ताकत है। हजारों पेड़ आंखों के सामने  काट दिए जाते हैं यह है मेरी वोट की ताकत? हमारी वोट की ताकत से राजनेताओं जन प्रतिनिधियो का जीवन खुशहाल हो जाता हैं, वे शक्तिशाली हो जाते है ऐसा लगता हैं जैसे जो वरदान  बाली को मिला था कि बाली के सामने जो भी खड़ा होता हैं उसका आधा बल  बाली को मिल जाता था, यहां भारतीय लोकतंत्र में तो  मतदाता का पूरा बल बाली  रूपी जन प्रतिनिधि के पास चला जाता हैं और वह  चुनाव आयोग से प्रमाण पत्र पाते ही अत्यधिक बलशाली हो उठता है। मतदाता याचक बन उसके आगे नतमस्तक हो खड़ा मिलने लगता हैं , जो कल तक  मतदाता के सामने याचक बन कर खड़ा रहता है , वही चुनाव जीतने के बाद मतदाता को याचक बना देता है यह कौन सी  हमारी वोट की ताकत है? करोड़ों के बंगले में पक्ष विपक्ष के जन प्रतिनिधि रहेंगे हमारी आवाज उठाएंगे , जैसे यदि करोड़ों के बंगले में रहने नहीं जाते तो हमारे लिए  इनके मुंह से आवाज ही नहीं निकलती? इस देश में मतदाता जब तक अपने कर्तव्यों के साथ सरकारी मुफ्त की योजनाओं को ठुकराना नहीं  सीखेगा, तब तक मतदाता की वोट की ताकत से राजनेता  अधिकारी जन प्रतिनिधि  यही  करेंगे जो वे कर रहे हैं और  जो दिख रहा है। मतदाता उठ जाग, मुफ्त की योजनाओं को ठुकराना सीख और अपने कर्तव्यों के साथ देश में अपनी वोट की ताकत पैदा  कर , नहीं तो यह देश सोने की चिड़िया नहीं सोने की लंका बन जाएगा और बन ही गया है , जिसमें  स्वर्ण महल में जन प्रतिनिधि निवास कर रहे है और मतदाता रूपी सीता का वोट ले ,अपहरण कर अशोक वाटिका में  कैद कर। लिया जा रहा हैं।
सुविधाओं को लेने में ये सभी    राजनैतिक दलों  के जन प्रतिनिधि, राज नेता , सरकार के अधिकारी एक जैसे है।
जय हो भारतीय लोकतंत्र की, जय हो भारत के मतदाता की हेमंत चंद्र दुबे बबलू
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