ड्रीबी की पहल: स्मार्ट डिलीवरी से लॉन्ड्री सेवाओं को आसान और किफायती बनाने की कोशिश

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मेरठ। नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाली इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एमआईईटी के बीटेक कंप्यूटर साइंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निशांत चौधरी भी प्रतिभाग कर रहे हैं।
आपको बताते चले, शहरों में लॉन्ड्री और ड्राई-क्लीनिंग सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए पिकअप और डिलीवरी हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। कभी ईंधन का बढ़ता खर्च, कभी देर से पिकअप, तो कभी हर ऑर्डर के लिए अलग-अलग चक्कर—इन सब समस्याओं से ग्राहक और डिलीवरी पार्टनर दोनों परेशान रहते हैं। इन्हीं रोज़मर्रा की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए ड्रीबी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने एक नया और व्यावहारिक समाधान पेश किया है, जिसे स्मार्ट डिलीवरी बैच सिस्टम नाम दिया गया है।
ड्रीबी का यह सिस्टम काम करने के तरीके को थोड़ा बदल देता है। इसमें हर ऑर्डर को अलग-अलग संभालने के बजाय पास-पड़ोस के ग्राहकों के ऑर्डर एक साथ जोड़े जाते हैं। ड्रीबी ऐप पर जैसे ही कोई ऑर्डर किया जाता है, ग्राहक की लोकेशन अपने आप दर्ज हो जाती है। इसके बाद आसपास के इलाकों से आए 3 से 5 ऑर्डरों को मिलाकर एक छोटा सा बैच बनाया जाता है, ताकि डिलीवरी पार्टनर एक ही बार में कई पिकअप या डिलीवरी कर सकें।
जब बैच तैयार हो जाता है, तो सिस्टम सबसे आसान और कम दूरी वाला रास्ता खुद ही तय कर लेता है। इसके लिए आधुनिक रूट ऑप्टिमाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि कम ईंधन खर्च होता है, समय की बचत होती है और डिलीवरी भी समय पर पूरी हो जाती है। अनावश्यक चक्करों में कमी आने से पूरी प्रक्रिया ज्यादा सुचारु और भरोसेमंद बन जाती है।
ड्रीबी के संस्थापक निशांत चौधरी का कहना है कि उनका मकसद तकनीक को जमीनी जरूरतों से जोड़ना है। वे बताते हैं कि ड्रीबी के जरिए स्थानीय लॉन्ड्री और ड्राई-क्लीनिंग सेवाओं को डिजिटल रूप दिया जा रहा है, ताकि ग्राहक अपने आसपास के भरोसेमंद वेंडर्स से आसानी से जुड़ सकें। एक सरल मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरी सेवा को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया है।
निशांत चौधरी आगे कहते हैं कि उनका फोकस ऐसे सिस्टम तैयार करने पर है, जो कम लागत में भी बड़े स्तर पर काम कर सकें। बैच-आधारित डिलीवरी और स्मार्ट रूटिंग जैसे फीचर न केवल व्यवसाय को मजबूत बनाते हैं, बल्कि डिलीवरी करने वालों के काम को भी आसान करते हैं।
ड्रीबी की यह पहल सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि लॉन्ड्री सेवाओं को ज्यादा समझदार, सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक छोटा लेकिन अहम कदम मानी जा रही है।



