गोड्डा

पथरगामा थाना क्षेत्र में चल रहा है बालू का अवैध कारोबार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बसंतराय। बसंतराय प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हिलावे पंचायत की गैरुवा नदी इन दिनों अवैध बालू खनन का बड़ा केंद्र बनती जा रही है। यह इलाका पथरगामा थाना क्षेत्र में आता है, और यहां से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक दिन या एक सप्ताह की बात नहीं है। महीनों से लगातार नदी का सीना चीरकर बालू निकाला जा रहा है। दिन के उजाले में ट्रैक्टरों की लंबी कतार लगती है। नदी किनारे से बालू उठाकर अलग-अलग जगहों पर डंप किया जाता है, और फिर रात के अंधेरे में हाईवे पर अवैध बालू लोड कर बाहर भेज दिया जाता है। आप तस्वीर में साफ देख सकते हैं कि किस तरह से खुलेआम बालू का उठाव किया जा रहा है। न तो किसी प्रकार की रोक दिखाई दे रही है, न ही किसी तरह की प्रशासनिक मौजूदगी। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है?
गैरुवा नदी क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि दिन भर ट्रैक्टरों की आवाजाही से गांव की सड़कें भी प्रभावित हो रही हैं। धूल उड़ती है, रास्ते टूट रहे हैं, और नदी के किनारे गहरे गड्ढे बनते जा रहे हैं। लगातार बालू निकालने से नदी की प्राकृतिक संरचना बिगड़ रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो अनियंत्रित बालू खनन से नदी की धारा बदल सकती है। बरसात के मौसम में कटाव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर खेती और पेयजल पर पड़ेगा। सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि इस पूरे मामले में गोड्डा खनन पदाधिकारी की भूमिका क्या है? क्या खनन विभाग को इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं है? या फिर जानकारी होने के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है?
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन माफिया इतने बेखौफ हैं कि दिन में भी खुलेआम ट्रैक्टर चलाते हैं। रात में हाईवे पर बड़े पैमाने पर बालू लोड किया जाता है। अगर यह सब हो रहा है, तो क्या स्थानीय प्रशासन और थाना को इसकी भनक नहीं लगती?
पथरगामा थाना क्षेत्र में चल रहे इस अवैध कारोबार ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून कहता है कि बिना वैध परमिट के खनन अपराध है। इसके बावजूद अगर महीनों से यह गतिविधि जारी है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
गोड्डा जिले के कई हिस्सों में अवैध बालू खनन पहले भी चर्चा में रहा है। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। जो बालू सरकारी नीलामी के जरिए खनन होना चाहिए, वह चोरी-छिपे निकाला जा रहा है। इससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंचता है।
राजस्व की हानि के साथ-साथ पर्यावरणीय नुकसान भी कम नहीं है। नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। जिस नदी पर आसपास के गांवों की जीवनरेखा टिकी है, वही नदी धीरे-धीरे खोखली की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गोड्डा खनन पदाधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करें। अवैध खनन में संलिप्त लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए। ट्रैक्टर और वाहनों को जब्त किया जाए, और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई हो।
यह भी जरूरी है कि रात के समय विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाए। क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार दिन से रात तक  बालू का खेल होता है, जब हाईवे पर बड़े ट्रकों में बालू लोड कर बाहर भेजा जाता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि गोड्डा खनन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाते हैं। क्या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह कुछ दिनों की चर्चा बनकर रह जाएगा? या फिर वास्तव में सख्त कार्रवाई कर अवैध बालू उठाव पर रोक लगेगी?
जनता की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है। गैरुवा नदी सिर्फ बालू का स्रोत नहीं है, बल्कि यह आसपास के गांवों की जीवनरेखा है। इसे बचाना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
    इस संबंध में गोड्डा खनन पदाधिकारी ने दूरभाष पर बताया कि सूचना मिली है, जांच कर कार्रवाई करेंगे।
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