
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। पुरे बीस साल बाद मिला कोलकाता के एक सेल्टर होम मे बेटे को माँ। फिर भवानाओ का सैलाब उमड़ा, दोनों एक दूसरे के करीब हुए। लेकिन आड़े आ गया, दोनों का अलग अलग धर्म। फिर बेटे ने कह दिया कि माँ आप तो क्रिस्चियन बन गई है, भला कैसे मै आपको अपने घर मे स्वीकार करूंगा।
दरअसल, मदन बेसरा जिसकी उम्र फिलहाल 33 साल है। उसके बचपन मे ही पिता राजेंद्र बेसरा कि मौत हो गयी थी। फिर माँ अपने बच्चों को लेकर अपने नानी और मौसी के यहाँ चली गयी। इसके बाद गरीबी से जूझती हुई माँ सुशीला मुर्मू किसी मिशनरिज संस्था से जुड़ सेवा कर अपनी जिंदगी गुजर बसर करने लगी। तकरीबन दो दशक बाद छोटा बेटा मदन बेसरा काम कि तलाश मे ढूंढ़ते हुए कोलकाता पहुंचा तो उसने अपने प्रयास से माँ को ढूंढ निकाला। इसके बाद वो बेटे से मिलने जुलने लगी जो अपने गांव गोड्डा के पोड़ैयाहाट के दाहूपगार गांव मे रहता था।
लेकिन इसी दौरान तब माँ के पैरो तले जमीन खिसक जब बेटे फोन पर बातचित के दौरान माँ को घर मे स्वीकार करने मे ये कहते हुए असमर्थता जता दिया कि उसका धर्म अब अलग हो गया है और बेट का अलग। माँ सुशीला ने क्रिस्चियन धर्म स्वीकार कर लिया है। जबकि बेटा मदन बेसरा सरना आदिवासी धर्म मे है।
जब इस पुरे विवाद पर मदन बेसरा के घर गोड्डा जिले के पौड़ैयाहाट के दाहूपगार पहुंचा तो मदन बेसरा अपनी पत्नी के साथ किराने का दुकान चला रहा था। उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसने ममता को तार तार करने वाली बात दिया था।
मदन ने कहा कि वो माँ से बहुत प्यार करता है। लेकिन उनके द्वारा गलती से ये बयान निकल गया। साथ ही उन्होने माँ से भी मोबाइल से बात करवाया जहाँ सुशीला मुर्मू ने पूरी कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ गलत फहमी हो गयी थी। लेकिन वह बेटे के साथ रहना चाहता है और बेटे ने भी साथ माँ को रखने कि बात कही और कहा उनसे गलती हो गयी वो जल्द ही माँ के पास जायेगा।
इस तरह माँ बेटे के रिश्ते मे जो धर्म आड़े आ रहा था वो ख़त्म हो गया है। वही बेटे ने कहा कि माँ कि मर्जी है वो जो धर्म चाहे मान सकती है। साथ ही कहा कि उनके गांव मे भी कई परिवार है, जिसने ईसाई धर्म स्वीकार कर रखा है।



