
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली : सांसद के सवाल से खुलासा रामगंगा और गोमती जैसी नदियों में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सरकार के पास व्यापक योजनाएं तो हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रदूषण की वास्तविक स्थिति और उसके प्रभाव का स्पष्ट, क्षेत्रवार आकलन उपलब्ध नहीं है।
सांसद नीरज मौर्य ने सरकार से पूछा था कि बरेली, बदायूं और जौनपुर क्षेत्रों में औद्योगिक अपशिष्टों से होने वाले प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण तथा वायु और जल प्रदूषण की निगरानी को लेकर प्रश्न पूछे गये थे। पर्यावरण मंत्रालय के उत्तर में बताया गया कि देशभर में 4922 स्थानों पर जल गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। नमामि गंगे, अमृत और अन्य योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता का उल्लेख किया गया। यह भी बताया गया कि 2025 में रामगंगा और गोमती में प्रदूषित नदी खंड चिन्हित किए गए हैं।
अखबार से बात करते हुये सांसद नीरज मौर्य नें कहा कि सरकार ने विभिन्न योजनाओं का तो हवाला दिया, लेकिन मूल प्रश्न स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के प्रभाव, स्वास्थ्य पर असर और त्वरित राहत उपाय पर कोई आंकड़े नहीं दिए गए। जब नदियों में प्रदूषण लगातार बना हुआ है, तो केवल योजनाओं और बजट का उल्लेख पर्याप्त नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी, जवाबदेही तय करने और स्थानीय स्तर पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है।



