गाजियाबाद
अंकुर बिहार थाना क्षेत्र में मुख्य बाजार बना चोरों का निशाना, पुलिस बनी मूकदर्शक!
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : अंकुर बिहार थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब न ताले सुरक्षित हैं, न वाहन और न ही आम आदमी की नींद। ताज़ा मामला देव भूमि सेनेटरी व इलेक्ट्रिकल स्टोर का है, जहां कामर्शियल मार्केट के बीचों-बीच दुकान का ताला तोड़कर चोर लाखों रुपये कीमत की पीतल व ब्रास की टंकियां और नकदी साफ कर ले गए। हैरानी की बात यह है कि यह वारदात किसी सुनसान गली में नहीं, बल्कि मुख्य बाजार में हुई—और पुलिस हमेशा की तरह “जांच में जुटी” रह गई।
इस चोरी के बाद व्यापारी वर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है, वहीं कॉलोनीवासी लगातार हो रही वाहन चोरी की घटनाओं से बुरी तरह त्रस्त हैं। कालोनी में स्कूटी, बाइक और अब चार पहिया वाहन भी सुरक्षित नहीं बचे। सवाल साफ है—पुलिस आखिर कर क्या रही है?
अंकुर बिहार निवासी लक्ष्मी आहूजा पत्नी कुलदीप बताती हैं कि उनकी टीवीएस जुपिटर (UP14 GF 7852) दिनांक 08/06/25 को जगन्नाथ फार्म हाउस के सामने से चोरी हो गई थी। महीनों बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस आज तक वाहन का कोई सुराग नहीं लगा पाई। ऐसे ही करीब आधा दर्जन पीड़ित रोज़ थाने के चक्कर काटने को मजबूर हैं—नतीजा शून्य।
वाहन चोरी के मामलों का खुलासा न होने पर एक चौकी इंचार्ज को हटाने की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अपराधियों पर कोई असर नहीं पड़ा। उल्टा, उनका मनोबल और बढ़ता दिख रहा है।
दिनांक 04/01/26 को क्षेत्र के दो हिस्ट्रीशीटरों को कुछ रकम वसूलते हुए गणमान्य लोगों के सामने पकड़े जाने का मामला भी चर्चा में है। लेकिन यहां भी पुलिस की “कारीगरी” ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में डाल दिया। सवाल उठता है—क्या कानून का डंडा सिर्फ आम आदमी के लिए है?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुलिस अधिकारियों को क्षेत्र में रोज़ हो रही घटनाओं की पूरी जानकारी होने के बावजूद अपराध पर अंकुश नहीं लग पा रहा। या यूं कहें—लगाया ही नहीं जा रहा। आखिर किस दबाव, किस मिलीभगत या किस लापरवाही के चलते अपराधियों को खुली छूट मिली हुई है, यह आम आदमी की समझ से परे है।
मुख्य बाज़ार से लेकर कॉलोनियों तक फैली यह अपराध की श्रृंखला पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर यही हाल रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब लोग खुद को असुरक्षित नहीं, बल्कि बेसहारा महसूस करने लगेंगे—और तब इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

