गाजियाबाद

लोनी में आवारा पशु बन रहे हादसों का कारण, गोकशी की आशंका से मचा हड़कंप 

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी (गाजियाबाद) : लोनी नगरपालिका क्षेत्र में आवारा व निराश्रित पशुओं की बढ़ती संख्या अब न केवल सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रही है, बल्कि इनके गायब होने और गोकशी की आशंका ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। ताजा मामला लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र का है, जहां कुछ लोगों द्वारा आवारा पशुओं को पकड़कर ले जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच हुआ है
गौरक्षक आशू पहलवान ने जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से कुछ असामाजिक तत्व आवारा घूम रहे पशुओं को पकड़कर गोकशी करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह तिलकराम कॉलोनी (लोनी बॉर्डर चौकी क्षेत्र) में कुछ लोग निराश्रित पशुओं को पकड़कर ले जाने का प्रयास कर रहे थे। स्थानीय लोगों को शक होने पर जब उनसे पूछताछ की गई, तो वे मौके से फरार हो गए।
आशू पहलवान और  अनुज नैन ने यह भी दावा किया कि गुलाब वाटिका क्षेत्र से भी कई निराश्रित पशु अचानक गायब हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि न तो नगरपालिका और न ही पशुपालन विभाग द्वारा इन पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रखने की कोई आधिकारिक सूचना दी गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर ये पशु कहां जा रहे हैं या उन्हें कौन ले जा रहा है?
लोनी क्षेत्र के बंथला, निठौरा रोड, पानी सादकपुर, पूजा कॉलोनी, डाबर तालाब, सादुल्लाबाद समेत कई इलाकों में सैकड़ों की संख्या में आवारा पशु खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही पशु गोकशी करने वालों के आसान निशाने बन जाते हैं। मौका मिलते ही ये लोग इन्हें वाहनों में भरकर ले जाते हैं।
स्थानीय निवासियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ऐसे लोग आसानी से कॉलोनियों के अंदर से पशुओं को ले जाने में सफल हो जाते हैं। कई बार ये लोग पुलिस को गुमराह कर निकल जाते हैं, जबकि पुलिस सड़क किनारे बैठकर अन्य कार्यों में व्यस्त रहती है।
सबसे बड़ा सवाल नगरपालिका, पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहा है। यदि समय रहते आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर रखा जाता और उनकी निगरानी होती, तो इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती थी।
अब देखना यह है कि सूचना मिलने के बाद पुलिस कब तक इन आरोपियों को गिरफ्तार कर पाती है और क्या प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं। फिलहाल क्षेत्र के लोगों में डर और आक्रोश दोनों बना हुआ है।
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