बागपत

“मैंने सिर्फ बीमारियां नहीं देखीं… मैंने टूटते हुए इंसानों को भी संभाला है…”

डॉ. अरविंद कुमार (MBBS, MD), चर्म, गुप्त, कुष्ठ एवं एलर्जी रोग विशेषज्ञ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : जनपद बागपत के सबसे वरिष्ठ एवं अनुभवी चिकित्सकों में से एक
स्थान: गांधी रोड, बड़ौत
प्रश्न (सुरेंद्र मलानिया):
डॉक्टर साहब, आपको जनपद बागपत में इस क्षेत्र का सबसे पुराना और अनुभवी डॉक्टर माना जाता है। इस लंबे सफर को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर (डॉ. अरविंद कुमार):
(आंखें थोड़ी नम हो जाती हैं…)
यह सफर आसान नहीं था…
मैंने सिर्फ बीमारियां नहीं देखीं, बल्कि उन बीमारियों के पीछे छिपा दर्द, अपमान और टूटता हुआ आत्मविश्वास भी देखा है।
जब मैंने शुरुआत की थी, तब चर्म और गुप्त रोगों को लोग किसी पाप की तरह छुपाते थे…
कई मरीज ऐसे मिले, जो इलाज से पहले ही समाज के डर से हार चुके थे।
प्रश्न:
कोई ऐसा अनुभव जो आज भी आपको अंदर तक हिला देता हो?
उत्तर:
एक बार एक युवक मेरे पास आया…
वो बीमारी से ज्यादा लोगों की बातों से परेशान था।
उसने कहा— “डॉक्टर साहब, अगर मैं ठीक नहीं हुआ तो मैं जिंदा नहीं रहूंगा…”
मैंने उसका इलाज किया, उसे समझाया…
कुछ महीनों बाद जब वो ठीक होकर आया और उसके चेहरे पर मुस्कान थी—
तो उसने मेरे पैर छू लिए…
उस दिन मैं खुद को रोक नहीं पाया…
एक डॉक्टर होने के बावजूद मेरी आंखों में आंसू आ गए।
तब समझ आया—हम सिर्फ शरीर नहीं, किसी की पूरी जिंदगी को ठीक कर रहे होते हैं।
प्रश्न:
कुष्ठ और त्वचा रोगों के मरीजों के साथ समाज का व्यवहार आपको कैसा लगता है?
उत्तर:
(गंभीर आवाज में)
दर्द होता है…
आज भी कई लोग कुष्ठ रोगी को छूने से डरते हैं, उनसे दूरी बना लेते हैं।
जबकि सच्चाई यह है कि सही इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।
सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब अपने ही लोग मरीज को छोड़ देते हैं…
मैंने ऐसे मरीजों को फिर से जीना सिखाया है।
प्रश्न:
आपके लिए डॉक्टर होना क्या है?
उत्तर:
मेरे लिए डॉक्टर होना सिर्फ एक डिग्री नहीं, एक जिम्मेदारी है…
यह एक ऐसा कर्तव्य है जहां आपको हर दिन किसी के दर्द से गुजरना पड़ता है।
मैं हमेशा अपने मरीजों से कहता हूं—
“दवा मैं दूंगा, लेकिन हिम्मत आपको रखनी होगी…”
प्रश्न:
आज की नई पीढ़ी और समाज के लिए आपका भावुक संदेश?
उत्तर:
बीमारी कोई अपराध नहीं है…
किसी भी मरीज को उसकी बीमारी के कारण अपमानित मत कीजिए।
और सबसे जरूरी—
अगर आपके आसपास कोई ऐसा मरीज है, तो उसे सहारा दीजिए, क्योंकि कई बार
“एक इंसान का साथ, दवा से ज्यादा असर करता है…”
जनपद बागपत में वर्षों से अपनी सेवा दे रहे डॉ. अरविंद कुमार सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि उन हजारों मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद हैं, जो समाज के डर और बीमारी दोनों से लड़ रहे हैं।
उनकी आंखों की नमी और शब्दों की सच्चाई यह बताती है कि
“असली डॉक्टर वही है, जो मरीज के दर्द को महसूस कर सके…”
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