
चार माह तक दबा रहा एसडीएम का अंतरिम आदेश
सीमांकन रिपोर्ट में देरी से उठे सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जिले की बरगवां तहसील अंतर्गत ग्राम डगा व गडरिया की बहुमूल्य शासकीय भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कई हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के बावजूद बेदखली आदेश का पालन न होने से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में भू कारोबारियों और अधिकारियों के बीच साठगांठ के आरोप भी जोर पकड़ने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम गडरिया की आराजी क्रमांक 8 की शासकीय भूमि पर कब्जे की शिकायत राजासरई निवासी भरत सिंह द्वारा की गई थी। उन्होंने तहसील कार्यालय बरगवां एवं एसडीएम कार्यालय देवसर में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इस पर तहसील कार्यालय द्वारा बेदखली आदेश जारी किया गया था।
हालांकि, इस आदेश के विरुद्ध अपील की गई, जिसे एसडीएम देवसर ने खारिज करते हुए तहसीलदार के आदेश को यथावत रखा। इसके बावजूद जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई।
चार माह बाद सामने आया अंतरिम आदेश
31 मार्च को शिकायतकर्ता भरत सिंह तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्हें जानकारी दी गई कि एसडीएम कार्यालय द्वारा चार माह पूर्व एक अंतरिम आदेश जारी किया गया था, जिसमें सीमांकन रिपोर्ट आने तक बेदखली कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह आदेश चार माह तक संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में क्यों नहीं आया और इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
सीमांकन में देरी क्यों
एसडीएम द्वारा पुनः सीमांकन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन चार माह बीतने के बाद भी न तो आरआई द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और न ही सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो सकी। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि मामले को जानबूझकर फाइलों में उलझाया जा रहा है।
आसपास की शासकीय जमीनों की भी खुल सकती है पोल
सूत्रों की मानें तो गडरिया की आराजी क्रमांक 8 के सीमांकन के दौरान आसपास की कई शासकीय जमीनों में संभावित हेराफेरी का खुलासा हो सकता है। बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि को डगा की खसरा नंबर 2157 की जमीन बताया जा रहा है, जिससे रिकॉर्ड में बड़ा अंतर सामने आ रहा है।
पेट्रोल पंप भी आ सकता है जांच के दायरे में
यदि सीमांकन में जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है, तो करीब 100 मीटर दूरी पर स्थित खसरा नंबर 33 में बने पेट्रोल पंप की जमीन भी जांच के दायरे में आ सकती है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
भू माफियाओं को संरक्षण के आरोप
लगातार हो रही देरी और आदेशों के उलझाव को देखते हुए राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों पर भू माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती, तो अब तक शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका होता।
शीघ्र कार्यवाही की मांग
अब इस पूरे प्रकरण में पुनः सीमांकन ही निर्णायक साबित होगा। यदि निष्पक्ष जांच की गई, तो जिले में शासकीय भूमि से जुड़े बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर आमजन की नजरें टिकी हुई हैं



