लखनऊ

गर्मियों से पहले बिजली व्यवस्था पर संकट के संकेत

कर्मियों की छंटनी और निलंबन पर प्रदेशभर में विरोध

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
लखनऊ :  उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की नीतियों के चलते राज्य की बिजली व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। समिति के  पदाधिकारियों के अनुसार, एक ओर बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नियमित कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं पर निलंबन जैसी विभागीय कार्रवाइयां की जा रही हैं। इस कारण से आगामी गर्मियों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की पूरी आशंका जताई गई ।
समिति का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण बिजली की मांग में बढ़ोतरी तय है। अनुमान है कि इस वर्ष देश में बिजली की मांग 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 36,000 मेगावाट के आसपास जा सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 से 15 प्रतिशत अधिक है। ऐसे समय में अनुभवी कर्मियों को काम से हटाना व्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इन फैसलों के विरोध में गुरुवार को प्रदेश के सभी जिलों में बिजली कर्मियों ने अपने-अपने कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति ने 11 अप्रैल को लखनऊ में सभी घटक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाने की भी घोषणा की है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन जानबूझकर बिजली व्यवस्था को कमजोर कर रहा है, ताकि बाद में निजीकरण के निर्णय को उचित ठहराया जा सके। वर्ष 2017 में निर्धारित मानकों के अनुसार जहां एक सबस्टेशन पर शहरी क्षेत्रों में 36 और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मचारियों की आवश्यकता थी, उसे घटाकर क्रमशः 18.5 और 12.5 कर दिया गया है। इसके चलते करीब 2500 संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त हो चुकी हैं।संघर्ष समिति के मुताबिक, लखनऊ में 340, अयोध्या में 52 और मेरठ में 193 संविदा कर्मियों को काम से हटाया गया है, जिससे कई स्थानों पर कर्मचारियों की संख्या बेहद कम रह गई है। इस कारण बिजली आपूर्ति सुचारु रूप से बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।इस दौरान समिति के अध्यक्ष प्रेम राज शर्मा, कार्यवाहक अध्यक्ष सतेन्द्र कुमार, महामंत्री जितेंद्र कश्यप, देवेन्द्र कुमार सिंघल और सचिन शर्मा ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रबंधन की नीतियों की आलोचना की और कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।समिति ने चेतावनी दी है कि यदि छंटनी और उत्पीड़न की कार्रवाइयां नहीं रोकी गईं, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन अब 491वें दिन में प्रवेश कर चुका है और विरोध लगातार जारी है।
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