ललितपुर
प्राइवेट स्कूलों की समस्याओं को लेकर सौंपा गया ज्ञापन
जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन ने बताया अपना पक्ष
प्राइवेट स्कूलों के बच्चों को भी सरकार उपलब्ध कराए निशुल्क पाठ्य पुस्तकें : अध्यक्ष
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। जिले के प्राइवेट स्कूल संचालकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में निजी विद्यालयों से जुड़ी पुस्तकों, शुल्क एवं ड्रेस संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन में प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन ने बताया कि किस प्रकार प्राइवेट स्कूलों के विरोध में माहौल तैयार किया जा रहा है। ज्ञापन के दौरान प्राईवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि जनपद के प्राइवेट विद्यालय शिक्षा व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में हमारे विद्यालय सरकार का कन्धे से कन्धा मिलाकर सहयोग कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों से विद्यालय संचालक पुस्तक एवं शुल्क संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग करते आ रहे हैं, जिस पर अभी तक अपेक्षित ध्यान जिला प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले सरकारी पुस्तकें बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती थीं, लेकिन वर्तमान में एनसीईआरटी की पुस्तकें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। इसी कारण विद्यालयों को मजबूरी में निजी प्रकाशनों की पुस्तकें लगानी पड़ती हैं। जिससे पाठ्यक्रम की लागत भी बढ़ गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय किसी विशेष दुकान को पुस्तक या ड्रेस के लिए निर्धारित नहीं करते हैं, बल्कि उपलब्धता के आधार पर अभिभावक स्वयं दुकानों से खरीद करते हैं। अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि नगर में तीस हजार बच्चे स्कूल जाने वाली उम्र के है और स्कूलों में है जिसमें से 27000 बच्चे प्राईवेट स्कूलों में अध्ययन कर रहें है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुये कहा कि इन 27000 छात्रों को भी सरकार की ओर से निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराये जिससे किताबों की समस्या का स्थाई समाधान किया जा सके। मंत्री धु्रव साहू ने शुल्क के संबंध में बताया गया कि जिले के लगभग 90 प्रतिशत विद्यालयों की मासिक फीस 1500 रुपये से कम है तथा अधिकांश विद्यालय 200 रुपये से 1500 रुपये प्रतिमाह तक की फीस लेते हैं। विद्यालय अभिभावकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष शुल्क वृद्धि भी नहीं करते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि आरटीई के अंतर्गत अध्ययनरत छात्रों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। उन्होने कहा कि जिला शुल्क नियामक समिति हमाने विद्यालयों के लिये शुल्क निर्धारित कर देते है तो हम उसका पालन करने को तैयार है। पूर्व अध्यक्ष मोहन सैनी ने ड्रेस के संबंध में कहा गया कि सामान्यत: विद्यालयों की ड्रेस 10 से 12 वर्षों तक परिवर्तित नहीं की जाती है तथा जनपद में ड्रेस उपलब्ध कराने वाली सीमित दुकानों के कारण अभिभावक उन्हीं दुकानों से ड्रेस खरीदते हैं। विद्यालयों द्वारा ड्रेस आदि को लेकर किसी भी प्रकार का दबाब नही बनाया जाता है। ज्ञापन में एसोसिएशन द्वारा मांगें रखी गई है कि बाजार में एनसीईआरटी की पुस्तकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिससे बच्चों को प्राईवेट प्रकाशन की मंहगी पुस्तकों से राहत मिल सके। ज्ञापने में आगे कहा किया है कि सभी बच्चों को सरकारी विद्यालयों की तरह पाठ्य पुस्तकें निशुल्क वितरित की जाये जिससे पुस्तकों के मंहगे सस्ते का मुददा स्थाई रूप से समाधान किया जा सके। जिला शुल्क नियामक समिति में निजी विद्यालयों के कम से कम दो प्रतिनिधियों को सदस्य नामित किया जाए। विद्यालयों के शुल्क की व्यवहारिक समीक्षा कर न्यूनतम शुल्क का निर्धारण किया जाए। अंत में एसोसिएशन ने आश्वासन दिया कि वे सरकार के साथ मिलकर जनपद में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ज्ञापन देने वालों में संजय श्रीवास्तव, राजेश माहेश्वरी, बसीम खजुरिया, राजेश दुबे, एमएलसी प्रतिनिधि विजय सिंह यादव, ध्यान सिंह यादव, राजेन्द्र सिंह यादव, राम सेवक, मोहन सैनी, रामगुलाम, श्रेयांश डियोढिया, सोहिल खान, हाजी उमेद रजा, स्वप्लिन बरया, अजय जैन, गोल्डी पाण्डेय, संजीव शर्मा तालबेहट, उदित गोस्वामी, संदीप नामदेव, अमर सिंह जमौरा, अवतार सिंह बंगरिया, प्रवीण यादव, हरिमोहन गोस्वामी, विश्वनाथ शुक्ला, कोमल चन्द्र, राजेन्द्र बाबू सेन, राजकुमार जैन, बलराम सिंह यादव, हेमन्त जोशी आदि उपस्थित रहे। संचालन महामंत्री धु्रव साहू ने किया।



