जालौन
पानी के अभाव में खेतों में ही सूखने की कगार पर पहुंची गेहूं की फसल
परेशान अन्नदाताओं ने नहरों में पानी छोड़ने की लगायी गुहार

नलकूलों को 18 से 20 घंटे विद्युतापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कुठौंद (जालौन)। मौसम के अचानक करवट बदलने से एक ओर जहां नहरों से पानी सूख चुका तो वहीं गेहूं की फसलों को पानी न मिलने से वह सूखने की स्थिति में पहुंचनी शुरू हो गयी है। ऐसी की समस्या से कुठौंद विकासखंड के अन्नदाता जूझते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इस ओर नहर विभाग के अधिकारी ध्यान देने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते गेहूं की फसल में पानी न लगाया तो वह सूख जायेगी और उसका दाना भी कमजोर होगा।
कुठौंद क्षेत्र में किसान आज गंभीर सिंचाई के संकट से जूझ रहा है। बेतवा नहर प्रखंड द्वितीय से निकली हरसिंगपुर रजवाहा से जुड़ी एकों माइनर, भोजापुर माइनर व अन्य माइनरों में पानी न आने से दर्जनों गांवों की गेहूं की फसलें सूखने की कगार पर हैं। क्षेत्र के अधिकतर किसान छोटी जोत वाले हैं। खरीफ में यहां बाजरा और कुम्हड़ा की खेती होती है, लेकिन समय पर पलेवा न होने से रबी की गेहूं की बुवाई देर से हुई। हालत यह है कि अब तक किसान सिर्फ एक ही सिंचाई कर पाए हैं और बढ़ते तापमान में खेतों में खड़ी फसलें मुरझा रही हैं। दूसरी ओर कुठौंद पावर हाउस से बिजली आपूर्ति भी बदहाल है। किसानों को मुश्किल से 1-2 घंटे बिजली मिलती है और उसमें भी बार-बार लाइन ट्रिप कर दी जाती है। ऐसे में किसान अपने निजी साधनों से भी सिंचाई नहीं कर पा रहा। किसानों का कहना है कि जब वह अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाते हैं तो सुनवाई नहीं होती। क्षेत्रीय किसान बच्चन लाल, रामकुमार श्याम सुंदर, सतीश चंद्र, राज नारायण, गोविंद, देवीदयाल, पप्पू, राजेंद्र अश्विनी, हरिओम, सुनील आदि का कहना है कि क्या हमारी मेहनत सिर्फ देश का पेट भरने के लिए है, और हमारी फसल सूखती रहे?। उन्होंने मांग की कि हरसिंगपुर रजवाहा से सभी माइनरों में फुल गेज से पानी छोड़ा जाए। टेल तक पानी पहुंचाने के लिए नियमित पेट्रोलिंग कराई जाए। किसानों को कम से कम 18-20 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो कुठौंद क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की मेहनत और फसल दोनों बर्बाद हो रही हैं।



