पालिका की सख्ती पर उठे सवाल ,वैकल्पिक व्यवस्था के बिना कार्रवाई का विरोध,तीखी नोकझोंक के बीच खिंची लकीर
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
कैराना। मुख्य बाजार से अतिक्रमण हटाने की तैयारी को लेकर नगर पालिका परिषद की बैठक बुधवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। जैसे ही कार्रवाई का मुद्दा उठा, व्यापारी भड़क गए और जोरदार विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते सभागार का माहौल गर्म हो गया और कई व्यापारी नाराज होकर बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए।
अधिशासी अधिकारी समीर कश्यप की अध्यक्षता में चल रही बैठक में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की जरूरत और मंशा स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन व्यापारी अपनी समस्याओं पर अड़े रहे। उनका साफ कहना था कि वर्षों से चल रहे कारोबार को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना उनके रोजगार पर सीधा हमला है। हंगामे के चलते बैठक कुछ देर के लिए ठप हो गई। स्थिति बिगड़ती देख अधिशासी अधिकारी ने बाहर गए व्यापारियों को मनाकर दोबारा बैठक में बुलाया, जिसके बाद दूसरा दौर शुरू हो सका। इस दौरान व्यापारियों ने खुलकर अपनी आशंकाएं रखीं और पहले ठोस योजना व वैकल्पिक व्यवस्था की मांग उठाई। पालिका प्रशासन ने सभी पक्षों को सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि कार्रवाई व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखकर ही की जाएगी। बावजूद इसके, बैठक में दिखा विरोध साफ संकेत दे गया कि अतिक्रमण हटाने की राह आसान नहीं रहने वाली।
बैठक में गरमाए मुद्दे, तीखी नोकझोंक
बैठक के दौरान पालिका प्रशासन और व्यापारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। व्यापारी अमित सिंघल ने सुझाव दिया कि शामली बस स्टैंड से मुख्य चौक तक डिवाइडर बनवाया जाए, जिससे अतिक्रमण की समस्या स्वतः खत्म हो सकती है। वहीं व्यापारी विपुल जैन ने पालिका टीम के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान टीम की भाषा अशोभनीय रही और व्यापारियों के साथ अभद्रता की गई। उन्होंने शहर में हुए डबल मर्डर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उस समय पुलिस ने व्यापारियों को असलहा रखने तक की सलाह दी थी—“हम असलहा संभालें या दुकान चलाएं?” बात कहकर इस सलाह को नकार दिया था। व्यापारियों ने मांग रखी कि पालिका स्पष्ट सीमा रेखा तय करे, जिसके भीतर ही व्यापारी अपना सामान रखें। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सीमा के बाहर रेहड़ी-ठेली लगती है तो उसकी जिम्मेदारी पालिका प्रशासन की होगी। इस पर अधिशासी अधिकारी समीर कश्यप ने साफ कहा कि दुकानों के सामने बनी अवैध पेडियां हटाई जाएं और किसी भी सूरत में दुकानों के आगे ठेली नहीं लगने दी जाएगी।
संकेत साफ: टकराव की आहट, समाधान अभी दूर
बैठक में भड़का आक्रोश यह दिखा गया कि अतिक्रमण हटाने का मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि व्यापारियों के अस्तित्व से जुड़ा सवाल बन चुका है। ऐसे में बिना ठोस रोडमैप के आगे बढ़ना प्रशासन के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
