ललितपुर
सरकारी बालिका कॉलेज में गंभीर अनियमितताओं के आरोप
ओबीसी महासभा ने डीएम से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। शहर में संचालित सरकारी बालिका कॉलेज में वर्षों से कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर गंभीर वित्तीय, प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों को लेकर ओबीसी महासभा ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।महासभा द्वारा दिए गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि संबंधित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विगत लगभग 20 वर्षों से विद्यालय में पदस्थ हैं, किंतु विद्यालय के मूल कार्यों के बजाय वित्तीय एवं प्रशासनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। आरोप है कि विद्यालय के वित्तीय अभिलेखों से छेड़छाड़, शुल्क वसूली में अनियमितता तथा विभागीय नियमों के विपरीत कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शासन की छवि प्रभावित हो रही है।शिकायत में आरोप है कि विद्यालय में अध्ययनरत गरीब व पिछड़े वर्ग की छात्राओं से निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि वसूली गई। आरोप है कि वसूली गई धनराशि का समुचित लेखा-जोखा नहीं रखा गया और न ही इसका उपयोग निर्धारित मदों में किया गया। इसके साथ ही विद्यालय के पुराने वित्तीय अभिलेख गायब किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे वित्तीय गड़बडिय़ों की आशंका और गहराती है।पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि विद्यालय समय में अमर्यादित भाषा एवं गाली-गलौज का प्रयोग किया जाता है, जिससे छात्राओं व महिला शिक्षकों को मानसिक असहजता का सामना करना पड़ता है। महासभा ने इसे विद्यालय के अनुशासन और छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर बताया है।ओबीसी महासभा ने मांग की है कि संबंधित कर्मचारी के पिछले तीन वर्षों के कार्यों, वेतन भुगतान, शुल्क संग्रह और खर्च का विशेष ऑडिट कराया जाए। साथ ही विद्यालय में कराए गए निर्माण व क्रय कार्यों की भी गहन जांच हो, ताकि यदि कहीं भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता हुई हो तो जिम्मेदारोंकीपहचानकर कार्रवाईसुनिश्चितकीजासके।महा सभा ने यह भी रेखांकित किया कि कॉलेज में लगभग 4 हजार से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा, अधिकारों और शैक्षणिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।शिकायती पत्र में जिलाधिकारी से मांग की गयी है कि मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी व अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।