गाजियाबाद

चौथे विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ सम्मेलन में जल–ऊर्जा संबंध पर मंथन

तापन, वेंटिलेशन, वातानुकूलन एवं प्रशीतन उद्योग में जल संरक्षण और ऊर्जा दक्षता पर विशेषज्ञों के विचार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
गाजियाबाद : तापन, वेंटिलेशन, वातानुकूलन एवं प्रशीतन (एचवीएसीआर) क्षेत्र से जुड़े चौथे विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ सम्मेलन में जल–ऊर्जा संबंध को मुख्य विषय बनाया गया। सम्मेलन में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।सम्मेलन का नेतृत्व एएसएचआरएई सोसाइटी के अध्यक्ष बिल मैकक्वेड तथा एएसएचआरएई इंडिया चैप्टर के अध्यक्ष संदीप गोयल ने किया। उन्होंने कहा कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि तापन एवं शीतलन प्रणालियों का अहम हिस्सा है, जो उनकी कार्यक्षमता, स्थिरता और दीर्घकालिक प्रदर्शन को प्रभावित करता है।सम्मेलन में शीतलन प्रणालियों में जल उपयोग कम करने, ऊर्जा दक्ष अभिकल्प अपनाने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा पर्यावरणीय प्रभाव घटाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि जल और ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग भविष्य की आवश्यकता है।
कार्यक्रम को सांसद  अनुराग सिंह ठाकुर ने संबोधित करते हुए कहा कि यदि देश का प्रत्येक नागरिक प्रतिदिन केवल 100 मिलीलीटर जल बचाए, तो 140 करोड़ नागरिकों का यह प्रयास बड़े स्तर पर जल संरक्षण का माध्यम बन सकता है। उन्होंने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर बल दिया।सम्मेलन में डॉ. वरुण जैन, पंकज धरकर, संदीप गोयल, आशीष राखेजा, आशीष गुप्ता, रिची मित्तल, वल्लीउल्लाह सिद्दीकी सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। वक्ताओं ने जल दक्ष तापन एवं शीतलन तकनीकों, स्मार्ट प्रणालियों और भविष्य की नीतियों पर अपने विचार साझा किए।सम्मेलन के सफल आयोजन ने उद्योग, सरकार और विशेषज्ञों के बीच भविष्य में सहयोग, नवाचार तथा नीति-स्तर पर जल दक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में नई संभावनाएँ खोली हैं।

चौथे विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि सतत विकास के लिए जल संरक्षण और ऊर्जा दक्षता को साथ लेकर चलना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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