ललितपुर
एसडीएम कार्यालय के पेशकार पर भ्रष्टाचार और अधिवक्ताओं से अभद्रता का आरोप
अधिवक्ताओं ने लामबंद होकर जिलाधिकारी के नाम एडीएम से की शिकायत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। उपजिलाधिकारी कार्यालय में तैनात एक पेशकार और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अधिवक्ताओं के साथ गाली-गलौज करने का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से जिलाधिकारी के नाम अपर जिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव को पत्र सौंपकर कठोर कार्रवाई की मांग की है। अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार, अधिवक्ता रमाकांत सिरौठिया और उनके साथी विशाल तिवारी से एसडीएम कार्यालय में तैनात पेशकार और कर्मचारी पर अवैध धन (रिश्वत) की मांग करने के आरोप लगे हैं। पत्र में कहा गया है कि शांति भंग के मामलों में जमानत के लिए आने वाले मुलजिमों को छोडऩे के एवज में अवैध वसूली की जाती है। शिकायत में उल्लेख है कि 4 मई 2026 की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच, जब अधिवक्ता अपने मुवक्किलों की पैरवी के लिए कार्यालय में थे, तब पेशकार विकास श्रीवास्तव ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि पेशकार ने वकीलों को चोर और दलाल जैसे अपशब्द कहे और उन्हें अपमानित किया। अधिवक्ताओं का कहना है कि मौके पर पुलिस भी बुलाई गई थी, लेकिन कर्मचारियों ने पुलिस के सामने भी अपना अडिय़ल रवैया जारी रखा। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि कार्यालय में कुछ प्राइवेट व्यक्ति भी अवैध रूप से न्यायिक कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। ज्ञापन देते समय गोविन्दनारायण सक्सेना, हेमंत चौधरी, महेंद्र जैन, आनंद चतुर्वेदी, रमाकांत सिरौठिया, विशाल तिवारी, विकास, रविंद्र, विशाल चौहान, शेरसिंह यादव, हेमंत चौबे, पुष्पेन्द्र गोस्वामी आदि अधिवक्ता ज्ञापन देते समय उपस्थित रहे।
कैमरों फुटेज खंगालने की मांग
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से निवेदन किया है कि कार्यालय में लगे कैमरों की जांच की जाए, जिससे घटना की सत्यता सामने आ सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्टाचार में लिप्त इन कर्मचारियों और अवैध रूप से काम कर रहे बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
प्रमुख मांगें
भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच हो, अधिवक्ताओं से अभद्रता करने वाले पेशकार और कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, कार्यालय में अवैध रूप से काम कर रहे प्राइवेट लोगों को तुरंत हटाया जाए। इस मामले में अब सबकी नजरें जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं।

