गाजियाबाद
लोनी नगर पालिका बोर्ड बैठक में हंगामा
सफाई और प्रकाश व्यवस्था के मुद्दे पर सभासदों का बहिष्कार

ईओ और चेयरमैन रंजीता धामा पर मनमानी के आरोप, पांच साल के सफाई टेंडर को लेकर बढ़ा आपसी विवाद
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : नगर पालिका परिषद लोनी की बोर्ड बैठक सोमवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और बजट को लेकर बुलाई गई बैठक में सभासदों और चेयरमैन रंजीता धामा के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात इतने बिगड़ गए कि चेयरमैन के बैठक बीच में छोड़कर चले जाने के बाद करीब 55 सभासदों ने बैठक का बहिष्कार कर वॉकआउट कर दिया।
बैठक में सबसे ज्यादा मुद्दा सफाई व्यवस्था और शहर की बदहाल मूलभूत सुविधाओं का छाया रहा। सभासदों ने अधिशासी अधिकारी के.के. मिश्रा और चेयरमैन रंजीता धामा पर मनमानी करने तथा जनप्रतिनिधियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए।
सभासदों की नगरपालिका में नहीं सुनी जाती बात
सभासदों का कहना था कि वे अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को लेकर नगर पालिका कार्यालय के लगातार चक्कर लगाते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है और अधिकारियों का रवैया पूरी तरह तानाशाहीपूर्ण हो गया है।
सभासदों ने कहा कि पालिका क्षेत्र के अधिकांश वार्डों में सड़कें टूटी पड़ी हैं, गलियां उखड़ी हुई हैं, नाले और नालियां जाम हैं तथा पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। अधिकांश गलियां अंधेरे में डूबी हुई हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोनी की बदहाली खुद बयां कर रही तस्वीरे
बैठक में कई सभासदों ने कहा कि नगर पालिका लोगों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रही है। नाला सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सामुदायिक शौचालयों की दुर्दशा और जगह-जगह फैली गंदगी को लेकर सभासदों ने नाराजगी जताई।
सभासदों ने तंज कसते हुए कहा कि प्रदूषण में देशभर में बदनाम हो चुकी लोनी की जनता अब गंदगी और बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है।
“फोन तक नहीं उठाते अधिशासी अधिकारी”
सभासदों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अधिशासी अधिकारी के.के. मिश्रा फोन तक नहीं उठाते। इसके अलावा सफाई निरीक्षक और जेई भी जनप्रतिनिधियों की शिकायतों और समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते।
पांच साल का सफाई टेंडर बना चैयरमैन और सभासदों के विवाद की जड़
बैठक में सफाई कार्य के लिए छोड़े गए पांच वर्षों के टेंडर को लेकर सबसे ज्यादा विवाद हुआ। सभासदों ने आरोप लगाया कि उन्होंने सफाई व्यवस्था को चार जोन में बांटकर अलग-अलग कंपनियों को काम देने की मांग की थी ताकि बेहतर निगरानी और जवाबदेही तय हो सके।
लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से एक ही कंपनी को पांच साल के लिए टेंडर दे दिया गया। आरोप है कि पुरानी सफाई कंपनी का नाम बदलकर टेंडर दिया गया है सभासदों ने सवाल उठाया कि टेंडर मिलने के 12 दिन बाद भी कंपनी के पास न तो पर्याप्त सफाई कर्मचारी हैं और न ही पर्याप्त ट्रैक्टर और टीपर उपलब्ध हैं। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था कैसे सुधरेगी, यह समझ से परे है।
“गोलमाल है भाई…” की गूंज
बैठक के बाद माहौल इतना गरमा गया कि कुछ सभासद व्यंग्यात्मक अंदाज में फिल्मी गीत “गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है” गुनगुनाते नजर आए, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर दोनों पक्षों में लगातार जारी रहा।
चेयरमैन के जाने के बाद सभासदों का वॉकआउट
सभासदों का आरोप है कि जब उन्होंने सफाई टेंडर और विकास कार्यों को लेकर सवाल उठाए तो चेयरमैन रंजीता धामा बैठक बीच में छोड़कर चली गईं। इसके विरोध में सभासदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और कहा कि यदि उनकी समस्याओं व मांगों का समाधान नहीं हुआ तो उनका बहिष्कार जारी रहेगा



