जालौन

उरई तहसील में एंटी करप्शन की बड़ी कार्रवाई कानूनगो समेत एक अन्य व्यक्ति हिरासत में

तहसील गेट पर हंगामा लेखपालों और अन्य कानूनगो ने किया विरोध धक्का-मुक्की के बीच टीम दोनों को लेकर रवाना

बबाल की संभावना देख एंटी करप्शन टीम दोनों को एट थाने ले गयी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई (जालौन)। स्थानीय गल्ला मंडी स्थित तहसील परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एंटी करप्शन टीम झांसी ने उरई तहसील में तैनात कानूनगो (राजस्व निरीक्षक) संदीप तिवारी एवं एक प्राइवेट व्यक्ति राजेंद्र श्रीवास्तव उर्फ लम्बरदार को हिरासत में ले लिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही तहसील परिसर में कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। उप जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर लेखपालों एवं अन्य कानूनगो द्वारा जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया तथा एंटी करप्शन टीम के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एंटी करप्शन टीम काफी देर तक दोनों आरोपियों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास में जुटी रही। विरोध कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी दिए बिना कार्रवाई की जा रही है। हालांकि भारी हंगामे और विरोध के बाबजूद टीम किसी तरह दोनों लोगों को अपने साथ लेकर निकलने में सफल रही। सूत्रों के मुताबिक एंटी करप्शन टीम दोनों को पहले उरई कोतवाली लेकर पहुंची थी लेकिन वहां भी लोगों की भीड़ जुटने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से दोनों को एट थाने ले जाया गया जहां आगे की पंूछतांछ और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एंटी करप्शन टीम ने कानूनगो संदीप तिवारी को किस आधार पर गिरफ्तार किया जबकि सूत्रों के अनुसार कथित रिश्वत की रकम करीब दस हजार रुपए एक अन्य व्यक्ति राजेंद्र श्रीवास्तव के हाथ में बरामद होने की सूचना मिली। चर्चा यह भी है कि टीम ने दोनों को कथित रूप से पैसे लेते समय पकड़ा लेकिन रकम सीधे कानूनगो के हाथ में नहीं मिली। ऐसे में कानूनगो की भूमिका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल बताया गया कि ऐरी रमपुरा निवासी किसान अनिल कुमार राजपूत ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी कि हदबंदी कराने के नाम पर उससे 15 हजार रुपए की मांग की जा रही है। बाद में मामला 10 हजार रुपए में तय हुआ था। शिकायत के आधार पर टीम ने जाल बिछाकर दोनों को पकड़ लिया। बताया गया है और एंटी करप्शन विभाग की और से अभी कोई आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामला किस कार्य से जुड़ा हुआ है और कितनी रिश्वत का था। इस कारण पूरे घटनाक्रम को लेकर तहसील परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
एसडीएम और तहसीलदार को नहीं कोई जानकारी
इस संबंध में उप जिलाधिकारी सदर एवं तहसीलदार उरई से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो दोनों अधिकारियों ने मामले की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें अभी इस कार्रवाई की जानकारी नहीं है और वह जानकारी प्राप्त करने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
घटना के बाद पूरे तहसील परिसर में दिनभर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिली वहीं आम लोगों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। अब सभी की नजर एंटी करप्शन टीम की अगली कार्रवाई और आधिकारिक खुलासे पर टिकी हुई है।
रिश्वत किसने ली और किसके हाथ में पाई गई? बना सबसे बड़ा सवाल
सूत्रों के अनुसार एंटी करप्शन टीम ने करीब दस हजार रुपए की रकम राजेंद्र श्रीवास्तव नामक व्यक्ति के पास से बरामद की है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब रकम कानूनगो संदीप तिवारी के हाथ में नहीं मिली तो उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया गया। पूरे मामले को लेकर तहसील कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और लोग एंटी करप्शन विभाग के आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहे हैं।
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