ललितपुर
विश्व जैव विविधता दिवस पर पृथ्वी संरक्षण का लिया गया संकल्प
प्रकृति और मानव के संतुलन को बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता : सिद्धार्थ शर्मा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। विश्व जैव विविधता दिवस पर स्तम्भकार सिद्धार्थ शर्मा ने पृथ्वी संरक्षण और जैव विविधता के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पृथ्वी केवल मिट्टी, जल, वन और खनिजों का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि यह समस्त जीव-जगत के अस्तित्व का आधार है। सौरमंडल के अनेक ग्रहों में पृथ्वी ही ऐसा अद्भुत ग्रह है जहां जीवन संभव हो पाया है और यहां की जैव विविधता ही इसे जीवंत एवं समृद्ध बनाती है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर उपस्थित वायु, जल, वनस्पति, पशु-पक्षी तथा सूक्ष्म जीव मिलकर एक संतुलित जैविक तंत्र का निर्माण करते हैं, जिसे जैव विविधता कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे ऋषियों ने पृथ्वी को माता और समस्त जीवों को एक परिवार का अंग माना। वसुधैव कुटुम्बकम और विश्वम भवति एकनीडम जैसे विचार मानव और प्रकृति के सहअस्तित्व की भावना को दर्शाते हैं। प्राचीन भारतीय जीवनशैली सादगी, संतुलन और संरक्षण पर आधारित थी, जिसमें मनुष्य केवल आवश्यकता के अनुसार ही संसाधनों का उपयोग करता था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक उपभोगवादी संस्कृति ने प्रकृति के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उपयोग करो और फेंक दो की मानसिकता के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। जंगलों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, रासायनिक पदार्थों का अत्यधिक उपयोग और औद्योगिक विस्तार के चलते अनेक जीव-जंतु एवं वनस्पतियां विलुप्ति के कगार पर पहुँच गई हैं। यह स्थिति केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास होना चाहिए जो प्रकृति के अनुकूल हो। विज्ञान और तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, किन्तु उनका असंतुलित उपयोग विनाश का कारण भी बन सकता है। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल सरकारों का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, जैविक खेती को बढ़ावा देना तथा वन्य जीवों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील होना जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी पृथ्वी को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अंत में कहा कि जैव विविधता दिवस हमें यह संदेश देता है कि पृथ्वी हमारी निजी संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों की साझा धरोहर है। धरती माता सभी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, लेकिन मनुष्य के असीमित लोभ को नहीं। ऐसे में समय की मांग है कि हम प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जैव विविधता संरक्षण को अपने जीवन का महत्वपूर्ण संकल्प बनाएं।
