
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के गुवाहाटी के जालुकबाड़ी इलाके में शुक्रवार को रेलवे विभाग द्वारा चलाए गए बड़े अतिक्रमण उन्मूलन अभियान में रेलवे की जमीन पर बने 200 से अधिक अस्थायी ढांचे (झोपड़ियाँ) ध्वस्त कर दिए। यह कार्रवाई अतिरिक्त ट्रैक बिछाने और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए आवश्यक जमीन साफ़ करने के उद्देश्य से की गई। अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान असम पुलिस, रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स (RPF), सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) और संबंधित मजिस्ट्रेटों की सहायता ली गई और इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। अभियान स्थल पर बुलडोज़र और एक्स्कैवेटर जैसी भारी मशीनरी तैनात की गई थी। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अतिक्रमण किया गया क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे से आदाबारी की ओर फैला हुआ एक निम्न-तलवाला वेटलैंड जोन है, जहां वर्षों से अवैधानिक कब्ज़े के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई संरचनाएँ अस्थायी थीं और कुछ लोगों ने कई झोपड़ियाँ बना कर किराये पर दे भी रखी थीं, जिससे बस्ती का विस्तार हुआ।अधिकारी ने कहा, “यह भूमि पूरी तरह से रेलवे की संपत्ति है और कई वर्षों से अवैध रूप से अधिग्रहित रही है। भूमि डबल ट्रैक बिछाने और अन्य रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं के लिए ज़रूरी है। हम ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे से आदाबारी तक के इस हिस्से को परियोजनाओं के लिये साफ़ कर रहे हैं।” रेलवे ने यह भी बताया कि लगभग 200 परिवारों का यहाँ निवास था और कई परिवारों का कहना था कि वे पिछले पांच-छह वर्षों से यहीं रह रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि भूमि पर कब्ज़ा रेलवे का है और बड़े सार्वजनिक अवसंरचना कार्यों की योजनाओं के मद्देनज़र अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों में भी इस इलाके में कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है, परन्तु कुछ स्थानों पर लोग पुनः लौट कर अस्थायी ढांचे बना लेते थे। इसी वजह से रेलवे ने इस बार कड़े कदम उठाए और कहा कि जब तक संपूर्ण इलाके को खाली नहीं कराया जाता, यह अभियान जारी रहेगा। कानूनी औपचारिकता और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर यह कार्रवाई की गई। सुरक्षा बलों ने शांति बनाए रखने के लिए इलाके में व्यापक तैनाती की जबकि रेलवे अधिकारियों ने ध्वस्त किए गए ढाँचों और सामान संबंधी रिकॉर्डिंग की। अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है; स्थानीय प्रशासन प्रभावित परिवारों की स्थिति और विकल्पों का आकलन कर भी सकता है, यह जानकारी मिली है। रेलवे सूत्रों ने कहा कि आगे की योजना और समय-सीमा परियोजना प्रगति और स्थानिक सर्वे के आधार पर घोषित की जाएगी।



