
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम विधानसभा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने रविवार को घोषणा की कि आगामी बजट सत्र से हिन्दी को विधानसभा की एक और आधिकारिक भाषा के रूप में जोड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि असमिया, अंग्रेज़ी और बोडो भाषाएँ अब भी सदन की कार्यवाही में नियमित रूप से उपयोग में रहेंगी और किसी भाषा को हटाया नहीं जा रहा है। दास ने बताया कि विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि असमिया, अंग्रेज़ी और बोडो के साथ‑साथ अब हिन्दी में भी सदन की कार्यवाही संचालित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि हिन्दी ‘राष्ट्र भाषा’ होने के नाते उसके प्रति सम्मान दिखाने के लिए उसे सदन की आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल किया जा रहा है। हिन्दी को जोड़ने के फैसले के बाद बोडो भाषा की स्थिति पर सवाल उठे, जिन पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि विधानसभा की कार्यवाही या किसी भी आधिकारिक कामकाज से बोडो भाषा को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोडो असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पहचान का अभिन्न हिस्सा है, जो बोडो समुदाय के इतिहास, परंपराओं और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि असम सरकार बोडो भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके विकास को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेगी, ताकि यह आने वाली पीढ़ियों तक फलती‑फूलती रहे। बोडो भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल आधिकारिक भाषाओं में से एक है। वर्ष 2020 में असम आधिकारिक भाषा (संशोधन) अधिनियम के माध्यम से बोडो को असम विधानसभा की सह‑आधिकारिक भाषा (Associate Official Language) का दर्जा दिया गया था। वर्तमान निर्णय के बाद विधानसभा में आधिकारिक भाषाओं के रूप में असमिया, अंग्रेज़ी, बोडो और अब हिन्दी का उपयोग किया जाएगा। अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने यह भी बताया कि विधानसभा की कार्यवाही प्रसारित करने वाले चैनल ALA TV का नाम बदलकर अब ‘असम विधान सभा TV’ रखा जाएगा। यह परिवर्तन भी बजट सत्र से लागू किया जाएगा।



