शामली
मंढा, नाच-गाना और कब्रों पर तकिया… जिजौला की बैठक में कुरीतियों पर मंथन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
चौसाना। जिजौला की जुमा मस्जिद में मुस्लिम धर्मगुरूओं ने सामाजिक दृष्टिकोण से एक मीटिंग बुलाई। जिसमें राजपूत समाज में होने वाली शादियों में होने वाले दिखावे, अनैतिक रीति-रिवाजों और कब्रों पर तकिया बनाने जैसी प्रथाओं का विरोध किया गया। यह पहला मौका नही है जब किसी समाज ने ऐसा विरोध किया हो ,समय-समय पर ऐसा विरोध समाज सुधारकों, धार्मिक गुरुओं और न्यायपालिका द्वारा किया जाता रहा है।
चौसाना के जिजौला गांव मे जुमा मस्जिद पर मुस्लिम मौलानाओं ने मंगलवार को समाज के मौजिज लोगो की एक बैठक बुलाई,जिसमे सामाजिक दृष्टिकोण से सुधार के एजेंडे का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव मे कहा गया कि लडको की शादियो मे होने वाले मंढे को बन्द किया जाना चाहिए। ताकि मंहगाई जैसे माहोल में दिखावा प्रथा बंद हो सके। दूसरा खडे होकर खाना खाने का विरोध किया गया ,जिसके अलग अलग वैज्ञानिक कारण भी बताये गए।तीसरा शादियो मे होने वाले नाच गाने बंद हो,इससे समाज पर गलत प्रभाव पडता है। इसके अलावा कब्रिस्तान में कब्रो पर तकिया ना बनाया जाये।
बैठक मे शामिल लोगो एवं धर्मगुरूओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव का समर्थन किया। इस दौरान मुफ्ती मोहम्मद फाजिल कासमी,कारी, नसीम साहब,मास्टर नाजिम राणा,डॉक्टर इस्तेकार राणा,पूर्व प्रधान जाहिद,यासीन राणा,राशिद सूफी,इसरार, अमीर साहब,सुहैल,अब्दुल वहाब,आबिद,शौकीन,जफरू,शाहवेज, आरिफ,मौलाना सनव्वर,कारी रमजान,इरदीस,शाहरुख,सलामुद्दीन, कारी अनस,मुफ्ती यह्यामुफ्ती आस मोहम्मद,कारी अब्दुर रहीम,कारी महबूब कासमी,मौलवी खालिद आदि मौजूद रहे।
