संभल

संभल में कब्रिस्तान की भूमि पर बनी दो मंजिला मस्जिद पर प्रशासन की कार्रवाई

1200 वर्गमीटर सरकारी जमीन कराई जाएगी कब्जामुक्त, चार बुलडोजर और पीएसी जवान रहेंगे मौजूद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

संभल : नखासा थाना क्षेत्र के कसेरुआ गांव में कब्रिस्तान की भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली है। तहसीलदार न्यायालय के बेदखली आदेश के बाद शनिवार को मस्जिद मुस्तफा कादरी सहित सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने का अभियान चलाया जाएगा।

प्रशासन के अनुसार राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 409 कब्रिस्तान की भूमि के रूप में दर्ज है। जांच में लगभग 1200 वर्गमीटर क्षेत्र में मस्जिद का निर्माण पाया गया, जिसके संबंध में न्यायालय में मामला चल रहा था। न्यायालय द्वारा बेदखली आदेश पारित किए जाने के बाद अब भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही है।

कार्रवाई को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। नगर पंचायत सिरसी और नगर पालिका संभल से चार बुलडोजर, डंपर, ट्रैक्टर और करीब 20 सफाई कर्मचारियों को लगाया गया है। वहीं विभिन्न थानों की पुलिस फोर्स के साथ 60 पीएसी जवानों की तैनाती की गई है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

मस्जिद कमेटी ने किया विरोध

मस्जिद के मुतवल्ली जाकिर हुसैन का कहना है कि मस्जिद कई दशक पुरानी है और ग्रामीण लंबे समय से यहां नमाज अदा करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि तहसीलदार न्यायालय के आदेश के विरुद्ध जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दाखिल की गई है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि अब तक कोई स्थगन आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया है, इसलिए नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

अन्य सरकारी भूमि पर भी मिले अतिक्रमण

राजस्व विभाग की जांच में गाटा संख्या 410, जो खाद गड्ढे के लिए दर्ज है, उस पर भी कई मकानों का निर्माण पाया गया। वहीं गाटा संख्या 411, जो वृक्षारोपण के लिए आरक्षित भूमि है, उसके एक हिस्से पर खेती किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन इन मामलों की भी जांच कर रहा है।

पहले भी दर्ज हो चुका है मुकदमा

जनवरी 2026 में इस मामले को लेकर सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि सरकारी भूमि को वक्फ संपत्ति दर्शाने और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद बेदखली आदेश तक पहुंचा।

प्रशासन का वर्जन

तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद राजस्व टीम द्वारा मौके की जांच कराई गई थी। जांच में सरकारी भूमि पर निर्माण की पुष्टि होने के बाद राजस्व संहिता की धारा 67 के अंतर्गत कार्रवाई शुरू की गई। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया, लेकिन भूमि के स्वामित्व संबंधी पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा और राजस्व अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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