
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कांधला। थाना क्षेत्र के गांव गंगेरू की सादात पट्टी स्थित छोटे इमामबाड़े को लेकर पिछले चार वर्षों से चल रहे विवाद पर वक्फ ट्रिब्यूनल ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने छोटे इमामबाड़े को सार्वजनिक वक्फ संपत्ति माना है और इसे किसी व्यक्ति या परिवार की निजी संपत्ति मानने से इनकार कर दिया है। साथ ही गांव के सभी लोगों को यहां मजलिस और मातम आयोजित करने का समान अधिकार बताया है।विवाद वर्ष 2022 में वक्फ बोर्ड द्वारा इमामबाड़े के प्रबंधन के लिए कमेटी गठित किए जाने के बाद शुरू हुआ था। अमीर मोहम्मद ने ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल कर इमामबाड़े और जोहर वाली मस्जिद को जन्नतुन्निसा वक्फ का हिस्सा बताते हुए मुतवल्ली पद पर अपने परिवार का अधिकार होने का दावा किया था। ट्रिब्यूनल ने उनके दावों को खारिज कर दिया था।न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि जन्नतुन्निसा वक्फ और छोटा इमामबाड़ा अलग-अलग वक्फ संपत्तियां हैं तथा सर्वे अभिलेखों में भी दोनों का अलग-अलग उल्लेख है। साथ ही वक्फ बोर्ड द्वारा वर्ष 2022 में गठित कमेटी और अफसर अब्बास को मुतवल्ली नियुक्त किए जाने के निर्णय को भी सही ठहराया।फैसले के बाद करीब सौ वर्ष पुराने जर्जर इमामबाड़े के पुनर्निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। कानूनी विवाद के कारण अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका था। मुतवल्ली अफसर अब्बास ने फैसले का स्वागत करते हुए सभी परिवारों से इमामबाड़े के पुनर्निर्माण में सहयोग की अपील की है।