अयोध्याराष्ट्रीय

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के नौ आरोपी, जिसका नाम अज्ञात में वो कौन?

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आठ लोगों को नामजद किया गया है और कई अन्य जांच के दायरे में हैं। जांच दल की सिफारिश पर मामला दर्ज हुआ।
राम मंदिर में चढ़ावे के मामले में एफआईआर संख्या 0090/2026 25 जून को दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। ट्रस्ट सदस्य श्रीकृष्ण मोहन की तहरीर और एसआईटी की संस्तुति के आधार पर एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ल, मनीष यादव समेत कुल 8 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि एक अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है। वो अज्ञात आखिर कौन हैं। एफआईआर में शामिल अधिकांश आरोपी दानराशि की गिनती और कैश प्रबंधन से जुड़े कार्यों में लगे हुए थे।
जांच के घेरे में कई चेहरे
मंदिर के चढ़ावे की गणना में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले में कई लोगों की भूमिका जांच एजेंसियों के निशाने पर है। इस प्रकरण में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को अहम किरदार माना जा रहा है। बताया जाता है कि वह मंदिर की व्यवस्थाओं में सक्रिय दखल रखता था और गणना प्रक्रिया की निगरानी भी करता था।
गणना कक्ष की चाबी उसके पास रहने की बात सामने आई है। अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा की ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। दोनों रिश्तेदारी के जरिए मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों के करीबी बताए जाते हैं। जांच के दौरान उनके घरों से कथित रूप से चोरी की रकम बरामद होने की बात कही गई है।
ऋकफ की कॉपी सामने आई,-मनीष यादव, जो टिन्नू यादव का भतीजा बताया जाता है, भी गणना प्रक्रिया में शामिल था और उसके पास से भी रकम मिलने की चर्चा रही। अविनाश शुक्ला और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की भूमिकाओं की भी जांच हो रही है। वहीं, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र पर अनुकल्प व लवकुश के साथ कथित साजिश में शामिल रहने के आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच जारी है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराएं 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ं) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच में मिले वित्तीय अभिलेखों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, चोरी, गबन, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित अपराधों की जांच आवश्यक है। मामले की विवेचना डीएसपी आशुतोष तिवारी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
ये हैं मुख्य आरोपी… जिन्हें किया गया गिरफ्तार, जानिए कौन क्या करता था?
1- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: ये चंपत राय का करीबी है। मंदिर की हर व्यवस्था में हस्ताक्षेप रहता था। गणना प्रक्रिया की देखरेख भी करता था। गणना कक्ष की चाबी इसके पास रहती थी। ये घटना का अहम किरदार है।
2- अनुकल्प मिश्रा: ये लवकुश मिश्रा का जीजा है। अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।
3- लवकुश मिश्रा: ये अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। अनुकल्प का साला है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।
4- मनीष यादव: ये टिन्नू यादव का भतीजा है। गणना प्रक्रिया में ये शामिल रहता था। इसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई थी।
5 – अविनाश शुक्ला: ये भी ड्यूटी गणना में लगती थी। इसके बैंक खाते से पांच लाख रुपये बरामद होने की चर्चा थी।
6- सुभाष श्रीवास्तव: ये गणना इंचार्ज था। गणना की पूरी प्रक्रिया इसकी निगरानी में होती थी।
7- करुणेश पांडेय: अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।
8- रमाशंकर मिश्र: अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।
एसआईटी के सामने पेश हुए आप सांसद संजय सिंह।
सांसद संजय सिंह ने  को सौंपे थे 11 दस्तावेज
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बृहस्पतिवार को एसआईटी से मिलकर जमीन की खरीद-फरोख्त संबंधी 11 दस्तावेज सौंपे। दावा किया कि इन जमीनों की बिक्री व खरीदारी में करोड़ों रुपये का हेरफेर व घोटाला किया गया। एसआईटी अब दस्तावेजों की तस्दीकर जांच शुरू की है।
सांसद ने आरोप लगाया है कि मंदिर के लिए कई जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं, जिससे चंदे की रकम को भारी नुकसान पहुंचाया गया। एसआईटी अध्यक्ष व लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मिलकर संजय सिंह ने कहा है कि जिन लोगों के नाम हाल ही में मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र में अनियमितताओं के मामले में सामने आए हैं, उन्हीं लोगों की भूमिका जमीन खरीद के विवादित सौदों में भी दिखाई दे रही है। उन्होंने दस्तावेज देने के साथ मामले की गहनता से जांच कर कार्रवाई की मांग की।
2 करोड़ की जमीन कुछ ही मिनटों में 18.5 करोड़ की
संजय सिंह द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार 18 मार्च 2021 को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने कुसुम पाठक और हरीश पाठक से गाटा संख्या 243, 244 और 246 की जमीन दो करोड़ रुपये में खरीदी।
आरोप है कि उसी दिन कुछ ही देर बाद यही जमीन ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपये में बेच दी गई। सांसद का दावा है कि इस एक सौदे में करीब 16.5 करोड़ रुपये का अंतर है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस बैनामे के गवाह तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा थे।

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