असम

असम में ‘राष्ट्रिय बीज भंडार’ योजना में बड़ा घोटाला।

तीन वर्षों में 6 करोड़ से अधिक की कथित हेराफेरी, विभागीय मंत्री पियूष हज़ारिका को शिकायत दाखिल। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम की कृषि विभाग की महत्वपूर्ण योजना ‘राष्ट्रिय बीज भंडार’ (National Seeds Reserve – NSR) से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। आरटीआई के तहत प्राप्त सरकारी दस्तावेजों के आधार पर ‘राइट टू इनफॉर्मेशन एक्टिविस्ट्स एसोसिएशन’ ने हाल ही में राज्य के कृषि मंत्री पियूष हज़ारिका को सौंपे गए एक विस्तृत शिकायत पत्र में बताया है कि पिछले तीन वित्तवर्षों में आपातकालीन बीजों के नाम पर कागजी तौर पर वितरण दिखाकर 6 करोड़ रुपये से अधिक सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया है।शिकायत में आरोप है कि योजना के जरूरी कार्यों के लिए ओपन टेंडर प्रक्रिया का पालन न करते हुए “मेसार्च अन्नपूर्णा सीड ग्रोअर्स समिति” नामक निजी ठेकेदार को तीन वर्षों में कुल लगभग 2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से और कुल मिलाकर 6+ करोड़ रुपये बिना विज्ञापन तथा बिना खुली निविदा के राशि आवंटित की गई। सरकारी रिकॉर्ड में उक्त संस्था द्वारा आपातकालीन उपयोग के लिए 30,000 क्विंटल धान बीज भंडारण दिखाया गया है, जबकि फील्ड सत्यापन में ऐसे बीज कहीं मौजूद नहीं पाए गए। शिकायत में आगे आरोप है कि ठेकेदार ने हर क्विंटल बीज के लिए सरकारी खाते से भंडारण, आंतरिक परिवहन, बोझाई-पैकिंग, भंडारण बैग क्रय और फ्यूमिगेशन जैसी कई जानकारियों के नाम पर काल्पनिक बिल बनाकर भुगतान लिया। आरोपित दरों में भंडारण 510 रु/क्विंटल, आंतरिक परिवहन 200 रु/क्विंटल, बोझाई व पैकिंग 250 रु/क्विंटल, बैग क्रय 50 रु/क्विंटल व फ्यूमिगेशन 10 रु/क्विंटल शामिल हैं। शिकायत के अनुसार वास्तविक भौतिक बीज की अनुपस्थिति के बावजूद ये लेखे बनाकर लाखों रुपये की निकासी हुई। आवंटन के आदेशों में किसी गोदाम या भंडारण स्थान का पता नहीं दिया गया था, और ठेकेदार के पास वैध बीज लाइसेंस व सही GST पंजीकरण भी नहीं था। आरोप है कि परिवहन बिलों में प्रयुक्त ट्रकों के मालिकों ने कहा कि उन्होंने बीज ढोने का कार्य कभी नहीं किया, और जिन ‘किसान समूहों’ को बीज उत्पादनकर्ता बताया गया, वे ‘भूतपूर्व’ सूची अथवा नकली सूची पाईं गई जिनमें फोन नंबर भी नहीं थे। इसके अलावा आरोप है कि कुछ राशियाँ सीधे व्यक्तियों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर की गईं तथा बीज परीक्षण के लिए कोई वास्तविक नमूना भी नहीं भेजा गया पर नकली प्रमाणपत्र बनाए गए। आरटीआई  एक्टिविस्ट संगठन ने मांग की है कि इस पूरे कांड की जांच ‘मुख्यमंत्री विशेष तदर्थी प्रकोष्ठ’ के माध्यम से कराई जाए, शामिल अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ फौजदारी मुकदमा दर्ज किया जाए तथा कंपनी द्वारा कथित तौर पर हड़पे गए 6+ करोड़ रुपये सरकार को वापस दिलाए जाएँ। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संभावित साक्ष्य नष्ट होने से बचाने के लिए संबंधित पाँच विभागीय अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए। संगठन ने प्रशासन को 30 दिनों की समयसीमा दी है; यदि इस दौरान ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में सार्वजनिक हित याचिका (PIL) दायर करने की चेतावनी दे रहा है। शिकायत की प्रतिलिपियाँ राज्य के मुख्यमंत्री, कृषि उत्पादन आयुक्त, कृषि विभाग के आयुक्त व सचिव तथा असम बीज निगम के प्रबंध निदेशक को भी भेज दी गई हैं। अब देखना है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता का नारा देने वाली असम सरकार इस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करेंगे या इसको नजरअंदाज करते हुए भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देंगे ।

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