बरेली

धांधली” का मंचन, शिक्षा व्यवस्था की अनियमितताओं पर तीखा कटाक्ष

"धांधली" नाटक ने झकझोरा, परीक्षा व्यवस्था की कड़वी सच्चाई आई सामने

प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं पर व्यंग्य
माधव की आत्महत्या वाला दृश्य देख भावुक हुए दर्शक
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं पर आधारित सशक्त नाटक “धांधली” का सफल मंचन किया गया। डॉ. प्रभाकर गुप्ता की कथा पर आधारित, अश्वनी कुमार द्वारा नाट्य रूपांतरित और विनायक कुमार श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित इस नाटक ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
नाटक की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक भाषण से होती है, जहां “नेता जी” परीक्षा पर चर्चा में कहते हैं कि परीक्षा और पुनः परीक्षा देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती है। इसके बाद तीन दोस्त माधव, मोहन और रवीना नीट की तैयारी करते दिखते हैं। कोचिंग के “शान सर” एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर फीस मांगते हैं। वहीं कोचिंग संचालक आपस में बात करते हैं कि पेपर लीक हो जाए तो भी फायदा ही है। माता-पिता बेवकूफ हैं, फीस मांगो तो भर ही देंगे।
परीक्षा के बाद तीनों दोस्त खुश हैं कि पेपर अच्छा हुआ। लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षा रद्द हो जाती है। सबसे मेधावी छात्र माधव टूट जाता है और आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है। माधव द्वारा माता-पिता के नाम लिखा पत्र सबसे भावुक दृश्य रहा।
नाटक में कोचिंग संस्थान, भ्रष्ट अधिकारी, मीडिया और राजनीतिक तंत्र की भूमिका को तीखे व्यंग्य से दिखाया गया। अंत में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए गए।
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