वर्धमार नदी में पुनः बहने लगा पानी, ‘एक जनपद–पांच नदियां’ अभियान को मिली बड़ी सफलता
वर्धमार नदी में जल प्रवाह शुरू होने से नदी पुनर्जीवन अभियान के सकारात्मक परिणाम आने लगे

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
सम्भल : जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल के निर्देशन में संचालित एक जनपद पांच नदियां अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण जल संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। तहसील गुन्नौर के विकासखण्ड गुन्नौर एवं विकासखण्ड जुनावई से होकर गुजरने वाली वर्धमार नदी में पुनः जल प्रवाह प्रारंभ हो गया है उल्लेखनीय है कि 6 जून 2026 को जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा ग्राम बाघऊ में विधिवत पूजा अर्चना नारियल फोड़कर तथा फावड़ा चलाकर वर्धमार नदी पुनर्जीवन अभियान का शुभारंभ किया गया था। इसके बाद राजस्व विभाग एवं संबंधित विभागों द्वारा युद्धस्तर पर नदी के पुनरुद्धार का कार्य कराया जा रहा है पुनरुद्धार कार्य प्रारंभ होने से पूर्व 5 जून 2026 को ग्राम बाघऊ स्थित वर्धमार नदी के कैचमेंट क्षेत्र में ग्राम समाज ऊसर भूमि पर अवैध रूप से निर्मित एक मजार को उप जिलाधिकारी गुन्नौर विकासचन्द्र तहसीलदार रवि सोनकर एवं नायब तहसीलदार रजपुरा अनुज कुमार राजस्व विभाग एवं पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसके उपरांत जेसीबी मशीनों की सहायता से नदी की मूल धारा को पुनर्जीवित करते हुए उसके प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने का कार्य निरंतर कराया जा रहा है लगभग 14.5 किलोमीटर लंबी वर्धमार नदी पास की बबराला झील (लगभग 3 हेक्टेयर एरिया) से निकलती है तथा विकासखण्ड गुन्नौर एवं जुनावई से होकर प्रवाहित होती है तथा आगे चलकर महावा नदी में मिलती है यह ग्राम बाघऊ चुहेली(गुन्नौर हीरापुर) नूरपुर अकबरपुर गुन्नौर सेमला सिरौरा काजी महमूदपुर बहलोलपुर से होकर भोजपुर ग्राम पंचायत में महावा नदी में मिल जाती है उप जिलाधिकारी गुन्नौर विकासचन्द्र ने बताया कि इस नदी के लगभग 8 से 9 किलोमीटर भाग में पुनरुद्धार कार्य सफलता पूर्वक पूरा किया जा चुका है तथा शीघ्र ही शेष कार्य को भी पूर्ण कर लिया जाएगा वर्षा ऋतु प्रारम्भ होने नदी में पानी प्रवाहित होने लगा है वर्धमार नदी में जल प्रवाह प्रारंभ होने से क्षेत्र के भूजल स्तर में वृद्धि किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह उपलब्धि जनपद प्रशासन द्वारा जल संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्जीवन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे सतत सुनियोजित एवं प्रभावी प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।



