सिंगरौली

शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय देउहाडाँड़ आमो की शिक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप: निरीक्षण के दौरान स्कूल से गायब मिले छात्र और शिक्षक; ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली की जांच की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली ,देवसर l देवसर विकासखंड के अंतर्गत संचालित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय देउहाडाँड़ आमो की शिक्षण व्यवस्था को लेकर स्थानीय ग्रामीणों एवं समाजसेवियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि विद्यालय में नियमित रूप से पढ़ाई नहीं हो रही है और शिक्षक भी निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं रहते, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है।
निरीक्षण में विद्यालय मिला खाली, वीडियो रिकॉर्डिंग का दावा
ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 6 और 7 जुलाई 2026 को जब विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया, तो वहां का नजारा बेहद चौंकाने वाला था। ग्रामीणों का दावा है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर में न तो कोई छात्र मौजूद मिला और न ही अधिकांश शिक्षक। यहां तक कि विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य भी मौके से नदारद थीं। ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम और खाली पड़े स्कूल की वीडियो रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया है।
रोटेशन पर चल रहा स्कूल, अतिथि शिक्षकों के भरोसे व्यवस्था
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में पदस्थ नियमित शिक्षक अपनी मर्जी से आपसी रोटेशन (बारी-बारी से आना) के आधार पर स्कूल आते हैं। इसके चलते अधिकांश समय शिक्षण कार्य केवल अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही रामभरोसे संचालित हो रहा है। मध्यान्ह भोजन समूह का बड़ा बयान स्कूल में मध्यान्ह भोजन समूह से जुड़ी एक महिला ने भी कैमरे पर बयान देते हुए दावा किया कि विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य महीने में केवल दो-तीन दिन ही स्कूल आती हैं। हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकार की फेस ऑथेंटिकेशन आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली पर खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए पूछा है कि: यदि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंच ही नहीं रहे हैं, तो उनकी ऑनलाइन उपस्थिति रोजाना किस प्रकार दर्ज हो रही है? क्या इस प्रणाली में किसी प्रकार की तकनीकी हेराफेरी की जा रही है?
गंदगी का अंबार, शौचालयों की स्थिति बदहाल
निरीक्षण के दौरान न केवल शैक्षणिक व्यवस्था, बल्कि स्कूल के बुनियादी ढांचे की पोल भी खुल गई। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय परिसर में चारों तरफ गंदगी फैली हुई थी और शौचालयों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय और असंतोषजनक पाई गई। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है कि ऐसे दूषित वातावरण से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। दोषी शिक्षकों और प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और ऑनलाइन उपस्थिति के डेटा की बारीकी से तकनीकी जांच कराई जाए ताकि बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा यह खिलवाड़ रुक सके।
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