भरत पुर
कृषि महाविद्यालय, भुसावर के नवनिर्मित प्रशासनिक एवं अकादमिक भवन, छात्रावास, कन्या छात्रावास एवं कैंटीन का भव्य लोकार्पण

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भुसावर । श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर की अधीनस्थ इकाई कृषि महाविद्यालय, भुसावर के नवनिर्मित प्रशासनिक एवं अकादमिक भवन, छात्रावास, कन्या छात्रावास एवं कैंटीन का भव्य लोकार्पण समारोह आज कृषि महाविद्यालय परिसर में आयोजित हुआ ।
समारोह के मुख्य अतिथि हरिभाऊ बागड़े, राज्यपाल, राजस्थान एवं कुलाधिपति, श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर रहे।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, कैबिनेट मंत्री, कृषि, उद्यानिकी एवं ग्रामीण विकास, राजस्थान सरकार तथा विशेष अतिथि बहादुर सिंह कोली, विधायक, वैर (भरतपुर) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने की। समारोह में अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, वैज्ञानिक, प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल के आगमन एवं स्वागत से हुआ। इसके पश्चात उन्होंने परिसर में वृक्षारोपण किया तथा नवनिर्मित प्रशासनिक एवं अकादमिक भवन, छात्रावास, कन्या छात्रावास एवं कैंटीन का विधिवत लोकार्पण कर उनका निरीक्षण किया।
मंचीय कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित साहित्य भुसावर अट ए ग्लांस का विमोचन किया तथा अपने उद्बोधन में कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं ग्रामीण विकास में कृषि विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए विद्यार्थियों एवं वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन किया।
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कृषि महाविद्यालय, भुसावर के नवनिर्मित भवनों के लोकार्पण के उपरांत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नई शैक्षणिक सुविधाओं से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का बेहतर वातावरण मिलेगा। उन्होंने कहा कि भवन और अन्य संसाधन केवल भौतिक सुविधाएँ हैं, वास्तविक महत्व इस बात का है कि विद्यार्थी यहाँ से कितना ज्ञान अर्जित करते हैं। यही ज्ञान उनके उज्ज्वल भविष्य का निर्धारण करेगा।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से सहनशीलता, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि उनमें सैनिक जैसी सहनशीलता एवं धैर्य होना चाहिए। उन्होंने वीरता और संघर्ष का उदाहरण देते हुए महाराणा सांगा के 80 घावों का उल्लेख किया तथा कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने कहा कि जिस समाज में शिक्षा का प्रकाश अधिक होता है, वहाँ विकास, समृद्धि, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक समानता एवं सांस्कृतिक चेतना का स्वाभाविक रूप से विस्तार होता है। शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, विचारों और जीवन-दृष्टि का भी निर्माण करते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि यदि देश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित मार्गदर्शन एवं पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, तो भारत को विश्व की अग्रणी ज्ञान-शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता। इसी सोच के साथ राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार, नवाचार एवं विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले, नवाचार को बढ़ावा देने वाले तथा समाज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने वाले युवा बनें। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट पहचान स्थापित करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर संस्थान का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा से प्राप्त ज्ञान को केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे गाँवों तक पहुँचाकर किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी दें, ताकि किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अधिक लाभ अर्जित कर सकें और कृषि क्षेत्र समृद्ध बने।
विशिष्ट अतिथि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, कैबिनेट मंत्री, कृषि, उद्यानिकी एवं ग्रामीण विकास, राजस्थान सरकार ने कहा कि भुसावर क्षेत्र उद्यानिकी उत्पादन में अग्रणी है, जहाँ आम, नींबू और अमरूद का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि यहाँ के केरी एवं नींबू के आचार की विशेष पहचान है तथा विषम परिस्थितियों के बावजूद किसान बेहतर उत्पादन कर रहे हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों से यूरिया एवं डीएपी का अंधाधुंध उपयोग नहीं करने तथा मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील की, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिले।
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय एवं कृषि महाविद्यालय, भुसावर की प्रगति एवं उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर 32वीं तथा राजस्थान में द्वितीय रैंक प्राप्त की है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न उन्नत किस्मों एवं अनुसंधान उपलब्धियों की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 12 जिलों में विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों का विस्तार है।
समारोह के अंत में महामहिम राज्यपाल, माननीय कैबिनेट मंत्री एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कृषि महाविद्यालय, भुसावर के अधिष्ठाता डॉ एम एल मीना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
समारोह में कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु डॉ. विमला डुकवाल तथा ब्रज विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. मदन राठौड़ सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों, छात्र-छात्राओं एवं कृषि वैज्ञानिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समारोह के दौरान सभी अतिथियों ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।



