
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। जिले में मानसून की बेरुखी का असर अब धान की खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के चेहरे पर मायूसी नजर आ रही है। जिले में अब तक लगभग 2 प्रतिशत ही बीज की रोपाई हो सकी है, जबकि किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते पर्याप्त बारिश हो जाती है, तो धान की रोपाई तेजी से पूरी की जा सकती है। लेकिन बारिश में देरी होने पर खेती का काम प्रभावित होगा। किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि मशीन से खेती करने के बावजूद हर किसान के लिए यह संभव नहीं है, क्योंकि इसमें अधिक खर्च आता है। वहीं, गोड्डा जिला अंतर्गत हरिपुर-गरवन्ना गांव के खेतों में महिलाएं पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई करती नजर आई। इस दौरान महिलाएं रोपाई गीत गाते हुए खेतों में धान लगा रही थीं। बारिश की आस और खेती की उम्मीद के बीच खेतों में महिलाओं का यह पारंपरिक अंदाज ग्रामीण संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहा था। किसान मनोज कुमार कुशवाहा ने बताया कि बारिश के बेरुखी के कारण खेत में पर्याप्त पानी नहीं होने से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए बोरिंग के माध्यम से मोटर लगाकर खेत में पानी भरकर जुगाड़ उपाय के तहत कुछ खेतों में धान की बुवाई हो पाई है। ऊपरी तल के खेतों में पानी का ठहराव नहीं हो पाने की स्थिति में खेत सुनसान पड़ा हुआ है। अब मानसून की स्थिति सुधर जाने के उपरांत की वैसे खेत में धान की बुवाई संभव है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष हरिपुर गरबन्ना गांव के किसानों को धान कटाई से पूर्व खेत में लबालब पानी भर जाने के कारण काफी नुकसान हो गया था। इस वर्ष शुरू से ही मानसून दगा दे रहा है, अब न जाने खेती कार्य कैसे हो पाएगा। किसान मनीष कुमार, सिकंदर मंडल, सत्यनारायण मंडल, राजेंद्र सिकदार, संजय मांझी आदि किसानों ने जुगाड़ व्यवस्था से ही फिलहाल खेती का कार्य कर रहे हैं। मगर इन किसानों की निगाहें आसमान की ओर टिकी है। जब तक पूरी तरह से वर्षा नहीं हो जाता है, इन किसानों की बेचैनी बढ़ी हुई है।



