बरेली
रिवर्स माइग्रेशन पर केंद्र के पास कोई डेटा नहीं: सांसद नीरज मौर्य
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली । लोकसभा के मानसून सत्र में सपा सांसद नीरज मौर्य ने दिल्ली में ग्रामीण युवाओं के पलायन और रिवर्स माइग्रेशन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शहरों में रोजगार कम होने से लोग मजबूरी में फिर से खेती की ओर लौट रहे हैं।
सांसद ने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण PLFS के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से पूछा कि रिवर्स माइग्रेशन से निपटने की नीति क्या है। भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसानों को ऋण, प्रशिक्षण व आधुनिक तकनीक कैसे मिलेगी। उन्होंने आंवला, जौनपुर, अंबेडकर नगर के साथ बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर जिलों का डेटा भी मांगा।
लिखित उत्तर में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि कृषि में लगे श्रमिकों का प्रतिशत 2023 में 46.1 प्रतिशत, 2024 में 44.8 प्रतिशत और 2025 में 43 प्रतिशत रहा। सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि अवसंरचना कोष, प्राकृतिक खेती और सूक्ष्म सिंचाई जैसी योजनाओं का उल्लेख किया।
हालांकि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि “रिवर्स माइग्रेशन या उसके कारण कृषि कार्यबल में हुई वृद्धि से संबंधित कोई अलग डेटा उपलब्ध नहीं है।” उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र योजनाओं के माध्यम से सहयोग कर रहा है।
सरकार के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि सरकार ने वास्तविक स्थिति बताने के बजाय केवल योजनाओं की सूची प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अभाव में लोग दोबारा खेती पर निर्भर हो रहे हैं तो सरकार को आंकड़े जुटाकर ठोस और समयबद्ध रणनीति बनानी चाहिए।
सौजन्य: मयंक शुक्ला, मीडिया प्रभारी – सांसद नीरज मौर्य


