बालाघाट
स्कूल बस में ठूंसे गए मासूम, सुरक्षा नियमों की उड़ रही धज्जियां
शांति इंग्लिश स्कूल भौंरगढ़ की बस में क्षमता से अधिक बच्चों के परिवहन का मामला, अभिभावकों में आक्रोश, जांच की मांग तेज

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है, लेकिन भौंरगढ़ स्थित शांति इंग्लिश स्कूल की एक स्कूल बस को लेकर सामने आए मामले ने बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्कूल बस में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को बैठाकर परिवहन किया जा रहा है। बस के भीतर बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाए जाने के दृश्य सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार स्कूल बस में इतने अधिक बच्चों को बैठाया गया कि कई बच्चों को ठीक से बैठने तक की जगह नहीं मिल रही थी। कुछ बच्चे एक-दूसरे से सटकर बैठे हुए दिखाई दिए, जबकि बस के भीतर पर्याप्त जगह का अभाव साफ नजर आ रहा था। अभिभावकों का कहना है कि यह स्थिति केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि मासूम बच्चों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। यदि किसी कारणवश वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए या अचानक ब्रेक लग जाए तो बड़ी संख्या में बच्चों के घायल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की संख्या बढ़ने के बावजूद परिवहन व्यवस्था में आवश्यक सुधार नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि कई बार स्कूल प्रबंधन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार देखने को नहीं मिला। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल की उम्मीद से स्कूल भेजते हैं, लेकिन यदि विद्यालय ही सुरक्षा मानकों की अनदेखी करेगा तो बच्चों का भविष्य और जीवन दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
स्कूल वाहनों के संचालन के लिए परिवहन विभाग और उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर विस्तृत नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी स्कूल वाहन में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता। इसके अलावा बस में प्राथमिक उपचार किट, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास द्वार, स्पीड गवर्नर, फिटनेस प्रमाणपत्र तथा प्रशिक्षित चालक और परिचालक की व्यवस्था होना अनिवार्य है। प्रत्येक स्कूल वाहन पर स्पष्ट रूप से “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए तथा सुरक्षा संबंधी सभी मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल बसों में ओवरलोडिंग सबसे गंभीर सुरक्षा खतरों में से एक है। जब वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री बैठाए जाते हैं तो वाहन का संतुलन प्रभावित होता है। अचानक मोड़, ब्रेक या सड़क दुर्घटना की स्थिति में नुकसान की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। बच्चों के मामले में यह जोखिम और भी अधिक हो जाता है क्योंकि वे स्वयं को सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं होते।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन समय-समय पर स्कूल वाहनों की जांच के दावे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है। उनका आरोप है कि यदि नियमित और प्रभावी जांच होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। नागरिकों ने मांग की है कि जिले के सभी निजी और शासकीय विद्यालयों की बसों की विशेष जांच अभियान चलाकर पड़ताल की जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मामले को लेकर क्षेत्र के अभिभावकों में गहरा रोष है। कई अभिभावकों ने कहा कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय हमेशा उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। यदि स्कूल बसों में इसी प्रकार क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता रहा तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उनका कहना है कि प्रशासन को केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई भी करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी संस्था ऐसी लापरवाही करने का साहस न कर सके।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
जिला परिवहन अधिकारी “देवेश बाथम” का कहना है कि यदि किसी स्कूल बस में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों का परिवहन किया जा रहा है, तो यह स्पष्ट रूप से मोटरयान अधिनियम और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। शिकायत प्राप्त होने या तथ्य सामने आने पर संबंधित वाहन की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) धनश्री जैन ने कहा -“स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि भौंरगढ़ स्थित शांति इंग्लिश स्कूल की बस में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों के परिवहन की जानकारी आपके द्वारा प्राप्त हुई है मामले की जांच कराई जाएगी।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
स्कूल के संचालक आर्यन चौधरी से हमारे संवाददाता द्वारा फोन लगाया गया किंतु समाचार लिखे जाने तक स्कूल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। यदि प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्टीकरण प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार, फिलहाल पूरे मामले में लोगों की निगाहें जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। अभिभावकों और नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की लापरवाहियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।
बच्चों की सुरक्षा केवल एक कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्कूलों को यह समझना होगा कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों का सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भौंरगढ़ में सामने आया यह मामला एक चेतावनी है कि यदि सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया गया तो किसी भी दिन एक छोटी सी लापरवाही बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।




