झुंझुनू
15 अप्रैल को नीट पेपर लीक से आहत होकर देश में पहली जान गंवाने वाले प्रदीप मेघवाल को 72 दिन बाद मिला इंसाफ
सीकर के गुरु कृपा कोचिंग कॉलेज के स्टूडेंट द प्रदीप माहिच

परिजनों ने सीकर के एसके अस्पताल में शव रखकर किया था प्रदर्शन
पुलिस प्रशासन ने खदेड़ा आंदोलन, परिजनों और सहयोग करने वाले नेताओं के साथ पुलिस अधिकारियों ने किया था अमानवीय व्यवहार
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झुंझुनूं। नीट पेपर लीक से आहत होकर देश में पहली बार जान को आने वाले प्रदीप मेघवाल को 72 दिन बाद इंसाफ मिला है। घटना 15 अप्रैल 2026 की है। झुंझुनूं जिले की गुढ़ागौड़जी तहसील के कनिकां की ढाणी के प्रदीप मेघवाल सीकर के गुरु कृपा कोचिंग कॉलेज के स्टूडेंट थे। जिन्होंने नेट पेपर से आहत होकर आत्महत्या की थी। 17 अप्रैल को पहली बार प्रदीप के परिजनों को इंसाफ देने के लिए श्रद्धांजलि सभा के रूप में संघर्ष कमेटी बनाई गई और यहीं से आंदोलन की शुरुआत हुई। संघर्ष कमेटी में आंदोलन के पुरोधा के रूप में पहचान बनाने वाले सुरेश मीणा किशोरपुरा को संघर्ष समिति का कर्ताधर्ता एवं अध्यक्ष बनाया गया। वहीं युवा नेता रवींद्र सिंह पौंख, समाजसेवी संदीप सैनी, पूर्व सरपंच दारा सिंह मेघवंशी, जेपी महला, शीशराम खटाणा, शिक्षाविद् श्रवण कुमार कांटीवाल, सुरेश पाल, विजेंद्र इत्यादि प्रमुख लोगों को जिम्मेदारियां सौंपी गई। संघर्ष कमेटी के नेतृत्व में पहले गांव-गांव और गुड्डा जैसे काशन में कैंडल मार्च निकाला गया इसके बाद सीकर में बड़ा प्रदर्शन किया गया। इसके बाद फिर से सुरेश मीणा किशोरपुरा एवं रवींद्र सिंह पौंख के नेतृत्व में शहीद स्मारक जयपुर में बड़ा प्रदर्शन कर सरकार के की से मुलाकात कर प्रदीप मेघवाल के परिजनों को इंसाफ दिलाने के लिए मांग पत्र सौंपा गया। संघर्ष कमेटी लगातार इंसाफ के लिए अधिकारियों से मिलते रहे गत दिनों 18 जून को मृतक प्रदीप के पिता को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचे सुरेश मीणा किशोरपुरा एवं रविंद्र सिंह पौंख ने प्रदीप के परिजनों को इंसाफ देने के लिए जंतर मंतर के मंच से देश में प्रदीप की आवाज उठाई। नीट पेपर लीक प्रकरण से पूरे देश में युवाओं का गुस्सा फूटा और सीजेपी पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके के नेतृत्व में जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन शुरू हुआ। संघर्ष कमेटी एवं स्वर्गीय प्रदीप माहिच के परिजन 20 जुलाई को संसद घेराव में शामिल हुए। इस दौरान आदिवासी नेता सुरेश मीणा किशोरपुरा दिल्ली पुलिस के द्वारा किए गए अंधाधुंध आंसू गैस गोलों के शिकार हुए। लाठीचार्ज की चपेट में आने से तबीयत खराब हुई और अस्पताल पहुंचे और अब भी आंखों का इन्फेक्शन और सीने की जलन समाप्त नहीं हुई है। सुरेश मीणा किशोरपुरा ने कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुंग, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी और न्याय की लड़ाई में सहयोग देने वाले तमाम कार्यकर्ता और स्टूडेंट शक्ति जिसकी वजह से फतह हांसिल हुई का मांगे पूरी होने पर आभार जताया। सुरेश मीणा किशोर पुराने कहा कि 12 साल के इतिहास में देश में पहली बार किसी बड़े आंदोलन में सफलता मिली है। इससे पहले देश में किसान आंदोलन, पहलवान बेटियों जैसे कई आंदोलन हुए जिनको सरकार ने बलपूर्वक दबा दिया। उन्होंने कहा की संघर्ष समिति ने शपथ खाई थी कि जब तक प्रदीप मेघवाल के परिजनों को इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक उनकी हस्तियों को गंगा में विसर्जन नहीं करेंगे। शनिवार को हमारी मांगे पूरी हुई।
*यह थी प्रमुख मांगे*
देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, मृतक नीट स्टूडेंट के परिजनों को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता राशि, शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सख्त कानून बनाने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग प्रमुख थी।
*मांगें जो पूरी हुई*
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। मृतक के परिजनों को एक करोड रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। एनटीओ के 25 अधिकारियों का बर्खास्त होने सहित 47 अन्य कर्मचारियों पर भी गाज गिरी। नीट पेपर लीक माफिया के खिलाफ 10 साल की सजा और 10 करोड रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। फर्स्ट न्यायालय का गठन कर तत्काल 90 दिन में फैसला किया जाएगा। सांसद खेराओं में शामिल स्टूडेंट पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे तथा इनमें कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। दो बड़े केंद्र में शिक्षा विभाग के बड़े कैडर के अधिकारियों को हटाया गया है। लाठी चार्ज में दोषी पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को निलंबित इत्यादि प्रमुख हैं।



